include_once("common_lab_header.php");
Excerpt for कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 30) by , available in its entirety at Smashwords

कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 30)

www.smashwords.com


Copyright


कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 30)

राजा शर्मा

Copyright@2018 राजा शर्मा Raja Sharma

Smashwords Edition

All rights reserved



कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 30)

Copyright

दो शब्द

फोटो फ्रेम Photo Frame

अँधेरे में नाचना Andhere Mein Naachna

बस यात्रा से प्रेम लीला तक Bus Yatra Se Prem Leela Tak

शर्मीली Sharmili

डर के साथ Dar Ke Saath

गिरफ्तारी Giraftaaree

लेखक Lekhak

एक मिनट रुको Ek Minute Ruko

2018 का सबसे अमीर व्यक्ति Sabse Amir Vyakti

गलती तो कीजिये Galati To Keejiye

कूड़े से करोड़पति तक Koodey Se Crorepati Tak

एक और Ek Aur Prayas

नामुमकिन कुछ भी नहीं Namumkin Kuch Bhi Nahi

उपहार उसके लिए Uphaar Uskey Liye

वो भ्रम नहीं था Wo Bhram Nahi Tha

सबसे बुद्धिमान Sabse Buddhimaan

अपना अपना नजरिया Apna Apna Najariya

सब बराबर क्यों नहीं? Sab Barabar Kyon Nahi?

मैं मरा नहीं Main Mara Nahi

अवसर खो दिया Avsar Kho Diya

आज़ादी के मतवाले Azadi Ke Matwaley

हिन्दू मुस्लिम विवाद रोका Hindu Muslim Vivad Roka

रॉकफेलर बिना टिकट Rockefeller Bina Ticket

आपकी हमारी संस्कृति Apki Hamari Sanskriti

अंग्रेज़ों को जवाब Angrezon Ko Jawab



दो शब्द


विश्व के प्रत्येक समाज में एक पीढ़ी द्वारा नयी पीढ़ी को कथाएं कहानियां सुनाने की प्रथा कई युगों से चलती चली आ रही है. प्रारंभिक कथाएं बोलकर ही सुनायी जाती थी क्योंकि उस समय लिखाई छपाई का विकास नहीं हुआ था. जैसे जैसे समय बीतता गया और किताबें छपने लगी, बहुत सी पुरानी कथाओं ने नया जीवन प्राप्त किया.


इस पुस्तक में हम आपके लिए 25 प्रेरणा कथाएं लेकर आये हैं. यह इस श्रंखला की तीसवीं पुस्तक है. हर कथा में एक ना एक सन्देश है और इन कथाओं में युवा पाठकों, विशेषकर बच्चों, के दिमाग में सुन्दर विचार स्थापित करने की क्षमता है. ये पुस्तक आपको निराश नहीं करेगी क्योंकि ये कहानियां दुनिया के विभिन्न देशों और समाजों से ली गयी हैं.


कहानियां बहुत ही सरल भाषा में प्रस्तुत की गयी हैं. आप अपने बच्चों को ऐसी कहानियां पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करके उनपर बहुत उपकार करेंगे. आइये मिलकर कथाओं की इस परम्परा को आगे बढ़ाएं.


बहुत धन्यवाद


राजा शर्मा


फोटो फ्रेम Photo Frame


वो सिर्फ बाईस वर्ष का था. कबाड़ी बाज़ार में असली कलाकृतियां या कोई छुपा हुआ खजाना खोजने वाले लोगों से वो बहुत ही कम उम्र का था. उस दिन उस बाज़ार में अधिकांशतः लोग अधेड़ उम्र के अनुभवी लोग थे. वो एक पुराना फोटो फ्रेम खोज रहा था.


वो चित्र बनाता था पर उसको अपने बनाये हुए चित्रों को बहुत ही पुराने पुराने फोटो फ्रेमों में सजाना अच्छा लगता था.


वो लोगों के चित्र पुराने फ्रेमों में लगाकर एक प्रकार का आनंद महसूस करता था. कभी कभी वो पुराना फ्रेम पहले खरीद लेता था और फिर उस फ्रेम के अनुसार ही चित्र बनाता था.


उसके बनाये हुए बहुत से चित्र उसके स्टूडियो में ही रखे थे क्योंकि उसको उन चित्रों को सजाने के लिए पुराने फ्रेम नहीं मिले थे. उस दिन कबाड़ी बाज़ार में उसने एक मेज पर एक पुराना फ्रेम देखा.


वो एक मजबूत, साधारण, लेकिन सुन्दर सा फ्रेम था. उसने सोचा के वो फ्रेम किसी काम करते हुए स्त्री या पुरुष के चित्र के लिए अच्छा होगा.


उसने वो फ्रेम मेज पर से उठा लिया और उसमें लगाने वाले चित्र के बारे में कल्पना करने लगा.

उस फ्रेम में पहले से ही एक फोटो थी और वो बहुत ही अच्छी लग रही थी. ये जीवन में पहली बार हुआ था के उसकी उस फोटो को फ्रेम से हटाने की हिम्मत नहीं हुई.


वो उस चित्र को ना जाने क्यों नहीं फेंकना चाहता था. पहले वो जितने भी फ्रेम खरीदता था वो उसमें लगी हुई फोटो को निकाल कर फेंक देता था और अपने बनाये हुए चित्र लगा देता था.


उसने उस फ्रेम में लड़की के चित्र को देखा. वो लगभग सोलह या सत्रह बरस की लग रही थी. साधारण सी लड़की बहुत ही प्रभावशाली लग रही थी. उसकी सुंदरता अलग ही प्रकार की थी. शायद उसका चित्र उसके अंदर की सुंदरता दिखा रहा था.


उस लड़की के चित्र को देख कर उसने ऐसा महसूस किया के जैसे एक मुस्कान, एक हंसी, या एक विनम्र शब्द उस चित्र की सतह से बाहर आने वाला था. उसको लगा के उस चेहरे के अंदर बहुत कुछ अच्छा छुपा हुआ था. उसने उस चेहरे की उदारता पढ़ ली.


उसने चित्र को देखते देखते ही महसूस किया के उसको चित्र वाले चेहरे से प्रेम हो गया था. उसने बहुत देर तक उस लड़की के चेहरे को देखा. फ्रेम तो साधारण सा था परन्तु उसके साथ जुडी भावनाएं साधारण नहीं थी.


उसके दिमाग में बहुत से प्रश्न उठने लगे: कौन थी वो लड़की? उसकी उम्र क्या थी? क्या वो अभी तक जीवित थी? क्या वो विवाहित थी?


वो चित्र और फ्रेम किसी विशेष स्थान पर किसी घर में क्यों नहीं रखा हुआ था? वो चित्र उस व्यक्ति के पास क्यों नहीं था जिसके लिए वो लड़की महत्वपूर्ण हो सकती थी?


वो सोचने लगा के उस चित्र वाली लड़की को अवश्य ही किसी ने प्रेम किया होगा और उसने भी किसी से प्रेम किया होगा. उसके दिमाग में बहुत से चित्र उभरने लगे.


उसने जोर से कहा, "इस फोटो फ्रेम का मूल्य कितना है?"


मेज के पीछे खड़ी हुई एक ४० या ४५ वर्ष की औरत ने मुस्कुरा कर उसकी तरफ देखा. उस औरत ने कहा, "जब तुम इस चित्र को देख रहे थे मैं तुम्हारे चेहरे को पढ़ रही थी. तुमको पक्का विश्वास है के तुम ये फोटो फ्रेम खरीदना चाहते हो?"


वो भी उस औरत की तरफ देख कर मुस्कुराया के कैसे उस औरत ने उसके दिमाग को पढ़ लिया था. उसने पूरी ईमानदारी से कहा, "जी हाँ, मुझे यही फ्रेम चाहिए है.


लेकिन...ये लड़की का फोटो इस फ्रेम में बिलकुल ठीक है..मैं नहीं जानता के मुझे इसको खरीदना चाहिए? मैं तो ये भी विश्वास नहीं कर सकता के कोई इसको बेच रहा है?


इस फ्रेम में लड़की जो भी हो, पर मैं तो इतना ही जानता हूँ के उसके चित्र के लिए यही सबसे अच्छा फोटो फ्रेम है."


"तुम ऐसा क्यों कह रहे हो? तुमको कैसे मालूम? क्या कुछ लोगों के चित्र किसी विशेष प्रकार के फ्रेम में ही लगाने चाहिए?"


उसके चेहरे पर थोड़ी सी लाली आ गयी. उस औरत का प्रश्न तो बहुत ही सार्थक था. उसके किसी भी प्रश्न में जरा भी बनावट या छल नहीं था.


वो बोला, "मैं एक चित्रकार हूँ. मैं लोगों के चेहरों के चित्र बनाता हूँ. हाँ चेहरा फ्रेम के अनुसार ही होना चाहिए या फ्रेम चेहरे के अनुसार ही होना चाहिए. लेकिन मैं ये फ्रेम खरीदूंगा और ये फोटो भी इसी में रखूंगा.


इस चित्र की लड़की जो कोई भी है, पर मैं तो इतना जानता हूँ के इस चित्र और इस फ्रेम को बेचना ठीक नहीं है. मैं तो इस लड़की के चित्र बहुत ही प्रेम से बनाता! मैं उसके चित्र को इसी फ्रेम में लगाता."


मेज के दूसरी तरफ खड़ी औरत फिर से मुस्कुराई, पर इस बार उसकी मुस्कान में बहुत ही प्रेम और उदारता साफ़ थी. वो बोली, "शायद इस चित्र वाली लड़की को भी अपने चित्र बनवाना बहुत अच्छा लगता! क्या तुम इस लड़की से मिलना चाहोगे?"


"क्या? क्या आप इसको जानती हैं? मेरा मतलब, उसकी उम्र अब कितनी है? ये चित्र कितने वर्ष पुराना है?" वो हैरान होकर उस औरत के चेहरे को देखने लगा.


मेज के उस पार खड़ी औरत हंसने लगी. उसको बहुत अच्छा लगा था के कैसे वो युवा कलाकार उस लड़की के बारे में जानने के लिए कितना उत्सुक हो गया था. वो उसको कुछ देर और उलझाए रखना चाहती थी परन्तु उस युवक की आवाज़ में एक प्रकार की विनती थी.


उस औरत ने कहा, "ये चित्र चार वर्ष पुराना है. ये फोटो इस लड़की के पूर्व प्रेमी के पास था पर जब उसने इस लड़की से सम्बन्ध तोड़ लिया और दूसरी लड़की के साथ चला गया, उसने ये चित्र इस लड़की को वापिस दे दिया. इस लड़की को ये चित्र वापिस नहीं चाहिए था.


वो चाहती थी के वो चित्र उसके पूर्व प्रेमी के पास ही रहे ताकि वो कभी कभी उसको याद कर लिया करे. वो लड़की अब इस चित्र को नहीं रखना चाहती इसीलिए उसने ये चित्र बेचने के लिए मुझे दे दिया."


युवा कलाकार ने उस चित्र को फिर से बहुत ध्यान से देखा और कहा, "ये लड़की ठीक थी. इसकी आँखों में प्रेम दिख रहा है. बहुत ही सुन्दर है. उसका पूर्व प्रेमी मूर्ख ही था.


वो और भी बड़ा मूर्ख था क्योंकि उसने ये फोटो लड़की

को वापिस दे दी. मैं तो इस फोटो को हमेशा अपने पास ही रखता चाहे वो लड़की मुझे छोड़ ही देती."


अचानक उस बेचने वाली औरत की आँखों में आंसू आ गए. उसने आगे बढ़कर उस युवा कलाकार के हाथ को धीमे से पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया.


वो उसको जब अपनी तरफ खींच रही थी, उस कलाकार ने उसको रोका नहीं. वो बोल पडी, "तुम उस लड़की से मिल लो. वो अंदर टेंट में दुकानदारों के बच्चों को खिला रही है. वो भी तुमको मिलना चाहेगी."


उस चित्रकार के मन में हलचल हो गयी. क्या ये एक सपना था? वो बेचने वाली उसको खींच कर टेंट के अंदर ले गयी.


चित्र वाली लड़की बहुत से बच्चों से घिरी हुई एक छोटे से टेबल पर बैठी थी. उसने अपना सर उठाकर देखा के उसकी माँ एक युवक को हाथ से पकड़कर अंदर आयी थी.


वो बोली, "मम्मी, क्या चल रहा है?"


"बेटी, मैं तुमको किसी से मिलवाना चाहती हूँ. ये तुम्हारी फोटो खरीदना चाहते हैं." युवा कलाकार ने फोटो फ्रेम हाथ में ही पकड़ा हुआ था.


वो लड़की उठकर उस युवा कलाकार के सामने आ गयी. उसने कलाकार के हाथ अपने हाथों में ले लिए. वो उसकी आँखों को पढ़ने लगी.


वो बोल पडी, "आप इस फोटो को खरीद तो नहीं सकते, पर आप इस फोटो को ले सकते हैं, और मैं भी इस फोटो के साथ आउंगी."


माँ की ख़ुशी का तो ठिकाना ही नहीं रहा. युवा कलाकार उसकी आँखों में डूब गया. वो लड़की थी, वो था, और एक फोटो फ्रेम था.


उसने मुस्कुरा कर उस लड़की की आँखों में देखा और उसके हाथों को हलके से दबाते हुए कहा, "मैं ये फोटो फ्रेम लूँगा."


मित्रों,


कितना सुन्दर होता है दो लोगों का अचानक ही एक दूसरे के पास आ जाना. एक दूसरे से प्रेम करने के लिए कोई बहुत बड़ी योजना की तैयारी नहीं करनी पड़ती. प्रेम के तीर तो बस आँखों ही आँखों में चल जाते हैं और दो प्रेमिओं को पास ले आते हैं.


अँधेरे में नाचना Andhere Mein Naachna


हालाँकि उसकी पत्नी को मरे हुए एक वर्ष हो गया था, वो अभी भी उसके बारे में सोचकर आंसू बहाने लगता है. वो और उसकी पत्नी एक दूसरे के पूरक थे.


दोनों को ही संगीत, अच्छे खाने, फिल्में, टेलीविज़न कार्यक्रम, और किताबें अच्छे लगते थे. दोनों को ही जंगल में अपने लकड़ी के छोटे से घर में रहना अच्छा लगता था.


वो जंगल में एक दो माजिला लकड़ी का घर था. उसको वो घर उसके चाचा ने दिया था जिनकी अचानक ही मृत्यु हो गयी थी.


वो अब सोचता है के उसको उस समय ही सोच लेना चाहिए था के वो घर शुभ नहीं था. परन्तु वो कैथी के प्रेम में इतना डूबा हुआ था के उसको किसी और चीज़ का ध्यान ही नहीं रहता था.


कैथी की मृत्यु तो एकदम अचानक हो गयी थी. एक दिन वो दोनों एक पार्क में टहलते हुए अपनी अगली छुट्टियों की योजना बना रहे थे के कैथी अचानक नीचे गिर गयी. जब तक डॉक्टर्स आते वो जा चुकी थी, अचानक ह्रदय रुक गया था.


वो उसके मरने के बाद सात महीने तक काम के लिए नहीं गया था. वो बहुत बार अपने जंगल के उस घर के आस पास एक भूत की तरफ घूमता रहता था. उसको न खाने की, न स्नान करने की, और न ही सोने की चिंता रहती थी.


एक दिन अचानक एक बिल्ली के बच्चे ने सब कुछ बदल दिया. एक दिन जब वो जंगल में घूम कर घर वापिस आया, उसने उस बिल्ली के बच्चे को अपने दरवाजे के पास देखा.


उसको बहुत ठण्ड लग रही थी और वो घर की लकड़ी के पास बैठकर थोड़ी गर्मी लेने का प्रयास कर रही थी.


उसने उस बिल्ली के बच्चे को उठा कर प्यार से फुसफुसा कर कहा, "तुम कहाँ से आ गयी?" उसके गले में कोई पट्टा नहीं था इससे मालूम होता था के वो किसी की पालतू बिल्ली नहीं थी.


वो उसको घर के अंदर ले गया. अंदर एक कम्बल में उसको लपेट कर रख दिया. वो बिल्ली रात भर आराम से सोयी रही. अगली सुबह वो उसको एक पशु चिकित्सक के पास ले गया.


पशु चिकित्सक ने बताया के वो बिल्ली लगभग छे महीने की थी और एक मिश्रित प्रजाति की थी. डॉक्टर के अनुसार वो बिल्ली एकदम ठीक थी. डॉक्टर ने उसको सिखाया के उस बिल्ली को कैसे क्या खिलाना है और कैसे एक बक्से में रखना है.


वो उसके लिए खाना भी खरीद कर ले आया. जब वो खाता था तो वो उसके पैरों पर बैठ जाती थी और मियाऊँ मियाऊँ करती थी मानो उसको पूछ रही थी के वो क्या खा रहा था.


वो उसको बिल्ली का खाना खिलाने का प्रयास करता रहा परन्तु वो नहीं खाती थी. उसने प्रयास छोड़ दिए.


कुछ दिनों बाद वो हैरान होने लगा क्योंकि उस बिल्ली को भी वही सब खाना अच्छा लगता था जो उसको और कैथी को अच्छा लगता था. एक रात तो हद ही हो गयी. वो बैठकर टेलीविज़न देख रहा था.


वो कार्यक्रम कैथी को बहुत अच्छा लगता था. वो बिल्ली तुरंत सोफे पर चढ़कर उसकी गोदी में बैठ गई और टेलेविज़न देखने लगी.


उसने बिल्ली का नाम ऐश्ली रख दिया था. ऐश्ली उस टेलीविज़न कार्यक्रम को ऐसे देखने लगी मानो सब कुछ समझ रही थी. उसने अचानक चैनल बदल दी. वो बिल्ली रोने और गुर्राने लगी. उसने फिर से वही कार्यक्रम लगा दिया.


उसने बिल्ली को उठा लिया और कहा, "तुम यही कार्यक्रम देखना चाहती हो?" ऐश्ली ने जैसे मियाऊँ कहकर सहमति दिखा दी. उस दिन के बाद दोनों साथ बैठ कर देर रात तक टेलीविज़न देखते थे.


वो ऊपर की मजिल में अपने कमरे में सोता था और ऐश्ली नीचे अपने बक्से में. एक रात वो उसके बिस्तर पर आ गयी और उसके तकिये के पास चुपचाप सो गयी.


वो उसको देखकर सिर्फ मुस्कुरा दिया. अगली सुबह ऐश्ली ने हलके हलके पंजे उसके मुंह पर मारकर उसको उठा दिया.


वो हैरान हो गया था के कैसे उस बिल्ली को मालूम चला के उसके उठने का समय हो गया था. कैथी भी उसके चेहरे पर उँगलियाँ फेर कर उसको हर सुबह उठाया करती थी.


वो थोड़ा भयभीत होकर बिल्ली को देखने लगा. वो फर्श पर आराम से बैठी उसको ही देख रही थी.


Purchase this book or download sample versions for your ebook reader.
(Pages 1-19 show above.)