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कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 29)

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कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 29)

राजा शर्मा

Copyright@2018 राजा शर्मा Raja Sharma

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कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 29)

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दो शब्द

चमत्कारी सलीब (क्रॉस) Chamatkari Saleeb (Cross)

उस हाथ को जानती थी Us Hath Ko Janti Thee

सबसे नरम हाथ Sabse Naram Hath

ग्रामीण कुटीर Grameen Kuteer

इनके पंख क्यों हैं? Inke Pankh Kyon Hain?

अनुबंध Anubandh

अनूठी कहानी Anuthi Kahani

मेरा दोस्त Mera Dost

ऐमी का प्रश्न Amy Ka Prashn

अलविदा Alvida

एक परिवार Ek Parivaar

पाप-स्वीकृति Pap Sweekriti

कोई और है Koi Aur Hai

छुटकारा Chutkara

रिश्तों को समय दें Rishton Ko Samay Dein

काले बादल Kaaley Badal

वो डर रही थी Wo Dar Rahi Thi

वो बेजुबान Wo Bejubaan

पिता रो पड़े Pita Ro Pade

"समस्या" कभी नहीं "Samasya" Kabhi Nahi

वो फिर आएगी Wo Phir Aayegee

सम्बन्ध विच्छेद Sambandh Vichhed

लाकेट Locket

पहला और अंतिम Pahla Aur Antim

मुस्कान Muskaan



दो शब्द


विश्व के प्रत्येक समाज में एक पीढ़ी द्वारा नयी पीढ़ी को कथाएं कहानियां सुनाने की प्रथा कई युगों से चलती चली आ रही है. प्रारंभिक कथाएं बोलकर ही सुनायी जाती थी क्योंकि उस समय लिखाई छपाई का विकास नहीं हुआ था. जैसे जैसे समय बीतता गया और किताबें छपने लगी, बहुत सी पुरानी कथाओं ने नया जीवन प्राप्त किया.


इस पुस्तक में हम आपके लिए 25 प्रेरणा कथाएं लेकर आये हैं. यह इस श्रंखला की उन्तीसवीं पुस्तक है. हर कथा में एक ना एक सन्देश है और इन कथाओं में युवा पाठकों, विशेषकर बच्चों, के दिमाग में सुन्दर विचार स्थापित करने की क्षमता है. ये पुस्तक आपको निराश नहीं करेगी क्योंकि ये कहानियां दुनिया के विभिन्न देशों और समाजों से ली गयी हैं.


कहानियां बहुत ही सरल भाषा में प्रस्तुत की गयी हैं. आप अपने बच्चों को ऐसी कहानियां पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करके उनपर बहुत उपकार करेंगे. आइये मिलकर कथाओं की इस परम्परा को आगे बढ़ाएं.


बहुत धन्यवाद


राजा शर्मा


चमत्कारी सलीब (क्रॉस) Chamatkari Saleeb (Cross)


वो सलीब (क्रॉस) अमेरिकन गृह युद्ध के अंत होने के समय से ही एक कब्रिस्तान के प्रवेश द्वार पर लगा हुआ है. उस सलीब को कोई नाम भी नहीं दिया गया है. लोग इसको साउथर्न क्रॉस या दक्षिणी सलीब कहते हैं.


कहते हैं के ये सलीब उन सभी शहीद संघीय सैनिकों का प्रतीक है जो गृह युद्ध में मरे थे, हालाँकि उस कब्रिस्तान में उन सैनिकों की कुछ ही कब्रें हैं.


वर्षों से वो क्रॉस या सलीब, जो के धातु का बना है, उस कब्रिस्तान पर लगा हुआ है परन्तु किसी ने भी उसकी तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया था.


अचानक एक दिन कुछ लोग वहाँ आये और उस सलीब को हटाने की मांग करने लगे. वो कह रहे थे के वो सलीब देश के इतिहास के उस समय का प्रतीक है जिस समय अमेरिका में गुलाम प्रथा थी.


कुछ और लोग उस सलीब को हटाना चाहते थे क्योंकि वो कहते थे के वो कब्रिस्तान सरकारी जमीन पर है इस लिए शहर की नगरपालिका उस कब्रिस्तान की मालिक है. उनके अनुसार किसी भी सरकारी संपत्ति पर क्रॉस या सलीब नहीं हो सकता.


कुछ और लोग थे जो कहते थे वो सलीब सिर्फ ईसाई धर्म का प्रतीक है और उससे और धर्मो का वहां स्थान नहीं है. कुछ लोग ऐसे भी थे जो कहने लगे के वो सलीब युद्ध का एक स्मारक था और वो किसी धर्म का प्रतीक नहीं था.


उस शहर में एक नौ बरस का लड़का था जिसको उन सब बातों से कुछ फरक नहीं पड़ता था. उसको तो यही मालूम था के कब्रिस्तान एक ऐसा स्थान होता है जहाँ से दूर ही रहना चाहिए, विशेष कर के हेलोवीन के पर्व के दिनों में.


उस शहर में उस क्रॉस के पक्ष में और विपक्ष में बहुत से प्रदर्शन और सभाएं होने लगी. यहाँ तक के स्कूलों में भी बच्चे उसके बारे में अपने अपने तर्क देने लगे. ज्यादातर बच्चे उन बातों को ही दोहराते थे जो उनके माता पिता ने कही होती थी.


वो नौ वर्ष का बच्चा इन सब बातों में उलझने के बजाये अपने कमरे में वीडियो गेम्स खेलना ज्यादा पसंद करता था. एक दिन अचानक अपनी साइकिल चलाते चलाते वो नौ वर्ष का बच्चा उस कब्रिस्तान के पास पहुँच गया.


ना जाने क्या सोच कर वो अपनी साइकिल से उतरा और उस सलीब को देखने लगा. वो जानना चाहता था के क्या था उस सलीब में जिसके कारण पूरे शहर में इतना हो हल्ला हो रहा था.


उसको उस सलीब में विशेष कुछ भी नहीं दिखाई दिया. उसपर जंग लग चुका था, और वो सलीब इतना बड़ा भी नहीं था.


जब वो खड़े होकर उस सलीब को देख रहा था, अचानक एक बादल ने सूरज को छिपा लिया. कुछ सेकंड के लिए उस लड़के ने ऐसा अनुभव किया के वो सलीब अचानक चमका था.


उसको ऐसा लगा के बिना सूरज के प्रकाश के भी उस सलीब की सतह चमक रही थी. वो कुछ भी निर्णय नहीं ले सका. बादल चला गया और सूरज फिर से चमकने लगा.


अब सूरज के प्रकाश में उस लड़के ने देखा के उस सलीब की चमक गायब हो गयी थी. उसका हैरान होना बिलकुल स्वाभाविक था. वो साइकिल पर बैठ कर जाने ही वाला था के एक कार आकर उस कब्रिस्तान के सामने रुकी.


उस लड़के ने देखा के उस कार में चार लड़के थे. उनको देखकर ऐसा लगता था के वो हाई स्कूल में पढ़ते होंगे. वो सभी क्रोधित दिख रहे थे.


जब उन्होंने उस नौ बरस के लड़के को साइकिल के साथ देखा, ड्राइवर ने ब्रेक दबा कर कार का एक्सेलरेटर पूरा दबा दिया. धुवां और छोटे छोटे पत्थर और मिटटी उड़कर उस लड़के पर भी गिरे.


कुछ देर में वो कार चली गयी. वो लड़का साइकिल चलाने लगा और सोचने लगा के अगर वो वहां नहीं होता तो शायद वो लड़के उस सलीब को क्षति पहुंचाते या उखाड़ ही देते.


उस रात को वो लड़का अपने कंप्यूटर पर एक कामुक फिल्म देख रहा था. अचानक उसको ऐसा लगा के दूर कहीं बिजली गरजी थी.


उसने खिड़की में से देखा के दूर कब्रिस्तान की तरफ से बहुत ही चमकीला सफ़ेद प्रकाश आ रहा था. उसको ये नहीं मालूम चला के प्रकाश का स्रोत क्या था.


लड़का हैरान था क्योंकि कब्रिस्तान के आस पास बत्ती के खम्बे बिगड़े हुए थे और रात में प्रकाश का कोई भी स्रोत नहीं था. अचानक उसको वो चमक याद आयी जो उसने दिन के समय उस सलीब की सतह पर देखी थी.


वो सोचने लगा के क्या किसी ने उस सलीब के साथ कोई प्रकाश का स्रोत बाँध दिया था. पर ये मुमकिन नहीं था.


लड़के की जिज्ञासा उसके नियंत्रण से बाहर हो गयी और उस रात वो पहली बार चुपके से घर से बाहर निकल आया.


वो अपनी साइकिल चलाकर कब्रिस्तान की तरफ चल दिया वो हैरान था क्योंकि वहां तो बहुत सी कारें खड़ी थी. बहुत से लोग खड़े होकर उस सलीब को देख रहे थे.


लोगों ने और उस लड़के ने देखा के उस सलीब के आस पास कोई प्रकाश का स्रोत नहीं था. सभी हैरान थे क्योंकि वो सलीब ही बहुत चमक रहा था और उसमे से ही प्रकाश आ रहा था. प्रकाश बहुत ही तेज़ था और चारों तरफ उजाला हो गया था.


उस लड़के ने सोचा के ये क्या पागलपन था क्योंकि वो जंग लगा हुआ सलीब इतना प्रकाश कैसे छोड़ सकता था. सभी लोग आश्चर्यचकित थे.


और भी कारें और और भी लोग आना शुरू हो गए थे. सभी लोग खड़े होकर उस चमकते हुए सलीब को देख रहे थे.


अचानक उस नौ बरस के लड़के ने देखा के उसके पिताजी उसकी तरफ आ रहे थे. उन्होंने उस लड़के से कहा, "तुम यहां पर क्या कर रहे हो?" पिताजी क्रोधित थे, पर वो कुछ नहीं बोले और सलीब को देखने लगे.


उस लड़के ने अपने पिताजी से कहा, "मैंने अपने कमरे की खिड़की से प्रकाश देखा इसीलिए मैं ये देखने आ गया के क्या हो रहा था."


उसके पिताजी ने कहा, "ठीक है अब जल्दी से साइकिल लेकर घर जाओ. यहाँ दंगा होने की भी आशंका है."


लड़के ने लोगों की तरफ देखा और पिताजी से कहा, "मुझे तो नहीं लगता के यहाँ दंगा हो सकता है." उन्होंने देखा के बहुत से लोग प्रार्थना करने लगे थे.


अचानक एक पुलिस कार आकर वहां रुकी. दोनों पुलिस वाले भी लोगों की भीड़ को हटाने के स्थान पर खुद भी खड़े होकर उस चमकते हुए सलीब को देखने लगे.


कुछ ही देर में एक टेलीविज़न चैनल की गाडी भी आ गयी. एक स्त्री एक माइक लिए हुई थी और एक आदमी कैमरा से दृश्यों को प्रसारण के लिए भेजने की तैयारी करने लगा. उसने अपना कैमरा चालू कर दिया और वो महिला माइक पर बोलने लगी.


उस स्त्री ने लोगों से प्रश्न पूछने शुरू कर दिए. वो उस प्रकाश के बारे में लोगों के विचार लेने लगी. वो लड़का उस स्त्री के प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहता था इसलिए उसने अपने पिताजी से कहा के वो घर वापिस जा रहा था.


उसके पिताजी ने कहा, "ध्यान से जाना. सड़क पर बहुत सी गाड़ियां होंगी." उस लड़के ने घर जाकर पूरी बात अपनी माँ को बताई.


पहले तो उसकी माँ ने लड़के की बात पर विश्वास ही नहीं किया पर जब कुछ देर बाद पिताजी वापिस आ गए उसको विश्वास हो गया.


माँ ने पिताजी से कहा, "आपके विचार से उस सलीब के चमकने का क्या मतलब हो सकता है?"


पिताजी ने कहा, "मैं तो कुछ भी नहीं कह सकता, पर ये निश्चय ही एक चमत्कार है."


सभी लोग मानने लगे के वो एक चमत्कार ही था. क्रॉस को हटाने की मांग करने वाले लोग भी मानने लगे थे के वो एक चमत्कार ही था.


उस क्रॉस का विरोध समाप्त हो गया. कोई कहता के वो सलीब सीधा भगवन से जुड़ा हुआ था. कोई कहता के वो क्रॉस विश्वास का प्रतीक था.


एक हफ्ते के बाद उस सलीब ने चमकना बंद कर दिया परन्तु लोगों का आना नहीं रुका. लोग वहां आ कर प्रार्थनाएं करने लगे थे. बहुत से लोग उस सलीब के नीचे फूलों के गुच्छे छोड़कर जाने लगे. लोग मनोकामनाएं मांगने लगे.


अंत में नगरपालिका ने उस कब्रिस्तान में लोगों को ना दफ़नाने का आदेश दे दिया क्योंकि कब्रिस्तान के गेट पर उस सलीब के दर्शन करने वालों की भीड़ लगी रहती थी और फूलों के ढेर इकट्ठे हो चुके थे..


लगभग ६ महीने तक दिन रात उस सलीब के सामने पुलिस की उपस्थिति रही. धीरे धीरे सब कुछ सामान्य सा दिखने लगा, परन्तु कुछ भी पहले जैसा नहीं था. लोगों के विचार बदल चुके थे और बहुत से नास्तिक अब आस्तिक बन चुके थे.


स्कूल में बहुत से लड़के कहते थे के वो कोई चमत्कार नहीं था, कोई चालाकी थी, परन्तु उस नौ वर्ष के लड़के को चमत्कार में विश्वास हो गया था. उसने लड़कों से बहस करना छोड़ दिया था.


अब वो लड़का स्वयं एक पादरी बनने के लिए पढाई कर रहा है. वो अब बीस वर्ष का हो गया है परन्तु वो बहुत ही धार्मिक हो गया है. वो हंसकर कहता है के उसने कामुक फिल्में देखना भी उसी दिन बंद कर दिया था जिस दिन वो सलीब चमकना शुरू हुआ था.


मित्रों,


चमत्कार तो होते ही रहते हैं. हालाँकि वैज्ञानिक हर चमत्कार के पीछे के तर्क देने का प्रयास करते हैं, परन्तु वो सलीब अभी भी अमेरिका में उसी स्थान में है और उस चमत्कार के हज़ारों साक्षी भी हैं. विश्वास है तो प्रभु है अगर विश्वास नहीं है तो कुछ भी नहीं है.


उस हाथ को जानती थी Us Hath Ko Janti Thee


उस दिन ६ वर्ष की मिंडी का स्कूल में पहला दिन था. वो बहुत ही डरी हुई थी. वो पहली कक्षा की छात्र थी. इतने सारे अजनबी चेहरों को देखकर उसको असहज महसूस हो रहा था.


कक्षा के बाहर खड़ी मिंडी नहीं जानती थी के उसको अब क्या करना चाहिए. मिंडी से थोड़ा सा छोटा एक लड़का उसकी तरफ आया.


उसके लाल बाल थे और चेहरे पर छोटे छोटे तिल थे. उस लड़के ने एक शर्मीली सी मुस्कान दी और कहा, "मेरा नाम केविन है."


उसने अचानक मिनी का हाथ पकड़ लिया और उसको लगभग खींचता हुआ कक्षा के अंदर ले जाने लगा. उसने मिंडी की किताबों का बैग उसके डेस्क पर रख दिया और कहा, "मिंडी, मैं तुम्हारे पीछे ही बैठा हूँ अगर कुछ चाहिए हो तो बताना."


पहली बार मिंडी कुछ बोली, "तुमको मेरा नाम कैसे पता चला?"


"तुम्हारी किताबों के बैग पर लिखा हुआ है."


"तुम पढ़ भी सकते हो?"


"तुम नहीं पढ़ सकती?"


मिंडी का चेहरा सुर्ख हो गया पर वो बोली, "छोटे छोटे शब्द पढ़ सकती हूँ पर बड़े नहीं."


"मुझे मालूम था के तुम तेज़ हो. कोई बात नहीं. अब सिखाना सब टीचर का काम है."


"तुम मेरे साथ इतने अच्छे क्यों हो?"


इस बार केविन का चेहरा सुर्ख हो गया. वो शरमाते हुए बोला, "जिससे तुम शादी करने वाले हो उसके साथ तो अच्छा होना ही पड़ेगा."


"लेकिन...लेकिन...मैं तो अभी सिर्फ ६ साल की हूँ?"


केविन मुस्कुराया. वो मुस्कान मिंडी के दिमाग में अपनी छाप छोड़ गयी. केविन ने कहा, "तुम हमेशा तो ६ साल की नहीं रहोगी और न ही मैं."


कुछ बरसों बाद. सातवीं कक्षा के पहले दिन. मिंडी कभी भी मिडिल स्कूल में नहीं आयी थी. ये एक नया स्कूल था. उसको अपने होमरूम में जाना था पर इतने सारे गलियारे थे के वो असमंजस में थी.


अचानक किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया. वो पहचान गयी. उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी. वो केविन की तरफ मुड़ी.


"हेलो, मिंडी, हमें इस तरफ जाना है." उसने मिंडी के हाथ को जोर से पकड़ा हुआ था और उसको खींच कर अपने साथ मिंडी के होमरूम की तरफ ले जाने लगा. वो उसके साथ चल दी. वो केविन पर पूरा विश्वास करती थी.


मिंडी जानती थी के केविन उसको बिलकुल ठीक स्थान पर ले जाएगा. उसके होमरूम के दरवाजे पर रुकते हुए केविन ने कहा, "हम दोनों के होमरूम अलग अलग हैं.


तुम यहाँ पढ़ोगी और मैं उधर दूसरे कमरे में. बाद में मैं तुमको समाज शास्त्र की कक्षा में ले जाऊंगा. हम दोनों की कोई भी कक्षा साथ साथ नहीं है.


तुम बिलकुल भी मत शर्माना. बहुत सारे दोस्त बनाना और सबसे अच्छे से बात करना." केविन ने उसके हाथ को दबाया और चला गया.


तीन बरसों के बाद. दसवीं कक्षा का पहला दिन. उसने पहले इतना बड़ा स्कूल नहीं देखा था. तीन हज़ार छात्र थे उस स्कूल में. वो थोड़ा सा भय महसूस कर रही थी.


अचानक एक हाथ ने उसके हाथ को पकड़ लिया. वो पहचान गयी के वो केविन का ही हाथ था. उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी. उसने भी केविन के हाथ को हलके से दबा दिया.


केविन ने कहा, "मेरे साथ चलो. मुझे मालूम है किधर जाना है. हम दोनों का होमरूम एक ही है. वो विश्वास के साथ केविन का हाथ पकडे उसके साथ साथ चलने लगी. हाई स्कूल में केविन हमेशा उसका हाथ पकड़कर उसको आगे बढ़ाता रहा.


कुछ वर्षों के बाद. कॉलेज का पहला दिन. आज मिंडी का पहला दिन था. वो कॉलेज की भव्य ईमारत के बाहर खड़ी थी. केविन ने उसको लिखकर एक कार्ड भेजा था.


उसने उस कार्ड को सुबह से दस बार पढ़ लिया था. उसमें केविन ने सभी कक्षाओं के नक़्शे बना कर भेजे थे. उसने ये भी दिखाया था के कैफेटेरिया कहाँ था.


कार्ड में जहाँ वो खड़ी थी उस स्थान को एक बड़े से एक्स से चिन्हित किया गया था. वो अपनी सोचों में ही थी के एक हाथ ने उसके हाथ को पकड़ लिया. वो हाथ अब उसके कोमल हाथ से बहुत शक्तिशाली था.


"हेलो, मिंडी, मेरा हाथ पकडे रहो और मेरे साथ चलो. मैं तुमको तुम्हारे भविष्य की ओर ले चलूँगा."


मिंडी ने उस कार्ड को मोड़कर अपनी जींस की पिछली जेब में रख लिया और केविन के साथ चल दी.


कुछ वर्षों के बाद. उस दिन मिंडी की शादी थी. उसके पिताजी दो बरस पहले ही इस दुनिया से जा चुके थे. उसको चर्च में मंच तक लेजाने वाला कोई नहीं था. अचानक एक हाथ ने पीछे से उसके हाथ को पकड़ लिया. वो उस हाथ को पहचान गयी.


मिंडी के मुंह से निकला, "थैंक यू, केविन."


"चलो मेरे साथ मुझे मालूम है तुमको कहाँ ले कर जाना है." मिंडी मुस्कुराई. उसका होने वाला पति मार्क चर्च के अंदर मंच पर उसका इंतजार कर रहा था. केविन ने मिंडी को ठीक स्थान पर पहुंचा दिया.


पच्चीस बरसों के बाद. सभी लोग उस संस्कार गृह में पहुँच गए थे. मार्क का अंतिम संस्कार था. मार्क को सभी लोग चाहते थे. मिंडी और मार्क के पांचों बच्चे भी उपस्थित थे. अगले दिन मार्क को उसकी कब्र में दफ़न किया जाना था.


रीति रिवाज पूरे हो गए. मिंडी के बड़े बेटे ने पिता की प्रशंसा में कुछ शब्द कहे. सभी ने उसकी बहुत प्रशंसा की. उसने अपने पिता की जीवन कहानी बड़े ही मनोरंजक ढंग से सबको सुनायी थी.


जैसे ही मार्क के कॉफिन को उठाया गया, अचानक मिंडी के हाथ को एक हाथ ने थाम लिया. वो केविन का ही हाथ था.


वो केविन के साथ साथ लाश ले जाने वाली गाड़ी तक गयी. उसके बच्चे भी वहीँ थे. कुछ दोस्त भी वहां थे. वो बहुत ही कमजोर महसूस कर रही थी.


केविन ने उसके हाथ को हलके से दबा दिया और कहा, "सब ठीक है, मुझे मालूम है तुमको कहाँ ले जाना है."


वो मुस्कुरा दी और उसने कहा, "तुमने कहा था के तुम मुझसे शादी करोगे."


"हाँ, पर मैंने ये नहीं कहा था के कब शादी करूंगा." मिंडी ने उसके हाथ को हलके से दबा दिया. केविन ने भी उसके हाथ को दबा दिया.


दाह संस्कार पूरा हो गया. मिंडी ने मुस्कुरा कर केविन को देखा. वो उसके हाथ को दबा कर बोली, "मेरे साथ आओ केविन. मैं जानती हूँ तुमको कहाँ ले कर जाना है."


मित्रों,


पवित्र प्रेम बिना किसी शर्त के होता है. जो सच्चा प्रेमी होता है वो सिर्फ देना ही जानता है और कुछ पाने की इच्छा नहीं रखता.


प्रेम दो इंसानो के बीच हो सकता है और सारे जीवन चल सकता है परन्तु विडम्बना है के समाज ये चाहता है के प्रेम शादी में बदल जाए. ये जरूरी नहीं होता.


सच्चे प्रेम करने वाले मन से प्रेम करते हैं तन से नहीं. आज भी इस दुनिया में लाखों ऐसे सच्चे प्रेमी और प्रेमिकाएं हैं.


सबसे नरम हाथ Sabse Naram Hath


उसने महसूस किये हुए वो सबसे नरम हाथ थे. वो हैरान होती थी के वो हाथ इतने शक्तिशाली हो सकते थे?


उसने देखा था के कैसे उन हाथों ने पचपन गैलन के तेल के ड्रम को ऐसे उठा कर ट्रक में रख दिया था जैसे कोई पांच किलो की कोई चीज उठा कर रखता है.


जब वो हाथ उस तेल के ड्रम को उठाकर ट्रक में रख रहे थे, वो सोच रही थी के शायद वो ड्रम खाली था.


वो नरम हाथ भारी से भारी वस्तु को कितनी आसानी से उठा लेते थे. पर जब भी वो हाथ उसके हाथों को छूते थे वो महसूस करती थी के वो तो बहुत ही नरम और कोमल हाथ थे.


जब वो हाथ उसको उठाकर कार में बिठाते थे वो महसूस करती थी के जैसे वो हवा में उड़ रही थी. वो कितनी आसानी से उसको उठा लेता था.


उसको अपने दिव्यांग होने का एहसास भी भूल जाता था. वो सोचती थी के जब तक वो हाथ उसको उठा कर इधर से उधर रखते थे उसको दिव्यांग होना भी अच्छा लगने लगा था.


उसके कारण और उसके शक्तिशाली हाथों के कारण वो कभी भी स्वयं को दिव्यांग महसूस नहीं करती थी. यही सोच कर वो बहुत बार अनायास ही मुस्कुरा देती थी.


वो जानती थी के वो उसको दिव्यांग नहीं मानता था. वो कहता था के वो जैसी थी सबसे अच्छी थी.


वो बहुत प्रयास करके कुछ कदम चलती थी पर उसके कमजोर हाथ और पांव थक जाते थे और वो हार मान लेती थी. ये दिव्यांगता ही उसके लिए उपहार हो गयी थी क्योंकि इसके कारण ही वो पहली बार मिले थे.


वो हाई स्कूल पास करने वाली थी. वो किसी भी हाल में स्वयं चलकर ही अपनी डिग्री लेने के लिए मंच पर जाना चाहती थी. वो अपने वॉकर का सहारा नहीं लेना चाहती थी.


उसकी दृढ इच्छा शक्ति और संकल्प के कारण ही वो इतनी बड़ी कार दुर्घटना के बाद भी जीवित थी.


उस दिन उसने संकल्प कर लिया था के वो पूरी शक्ति लगाकर तीस कदम चलकर अपनी डिग्री लेने मंच तक जाएगी. और उसने कर के दिखा भी दिया.


मंच के दूसरी तरफ की सीढ़ियों के बारे में उसको याद नहीं रहा था. पहली सीढ़ी उतरने के बाद उसकी टांगों ने जवाब दे दिया.


वो अपनी डिग्री को नीचे नहीं गिरने देना चाहती थी पर उसको किसी चीज का सहारा लेना भी जरूरी हो गया था. उसे नीचे उतरना ही था. उसको लगने लगा के वो सीढ़ियों से नीचे गिर जाएगी.


उसने अपनी आंखें बंद कर ली और आशा करने लगी के गिरने से उसकी गर्दन ना टूट जाए. अचानक उसको ऐसा लगा के जैसे वो हवा में उड़ रही थी. वो वहां आया हुआ था . उसकी छोटी बहन भी उस दिन डिग्री ले रही थी.


जब दो वर्ष पहले वो उस हाई स्कूल से पास हुआ था, उसकी बहन भी डिग्री समारोह में आयी थी. वो उस समय मंच के पीछे खड़ा था जब वो नीचे गिरने वाली थी.


वो मंच के पीछे खड़ा होकर अपनी बहन की सबसे अच्छी फोटो लेने के लिए वहाँ खड़ा था.


जब उसने उस दिव्यांग लड़की को अपने वॉकर को छोड़कर चलते हुए देखा, उसने उस लड़की के साहस की प्रशंसा की थी.


वो नहीं जानता था के वो लड़की पूरे मंच को कैसे पार करेगी, परन्तु उसने मंच पार कर लिया. जैसे ही उस दिव्यांग लड़की ने अपनी डिग्री हिला कर लोगों को दिखाई, वो समझ गया था के वो लड़की समस्या में थी.


सभी लोग ताली बजा कर उस दिव्यांग लड़की की प्रशंसा कर रहे थे. वो अति उत्साह में नीचे उतरने लगी थी परन्तु उसने देख लिया था के वो समस्या में थी. वो मंच के नीचे से उसके पास आने लगा. वो उसकी प्रतीक्षा करने लगा.


वो सीढ़ियों को ही देख रही थी जब अचानक उसके कदम डगमगाए और वो रेलिंग के उस तरफ गिरने को हुई. वो नीचे गिरी पर वो तैयार खड़ा था उसको लपकने के लिए.


मंच से गिरती हुई वो सबसे शक्तिशाली नरम हाथों में सुरक्षित पहुँच गयी थी. सभी दर्शक लोग चकित रह गए थे.


उसके हाथों में वो एक हलकी सी गुड़िया जैसी ही थी. वो उसको सुरक्षित स्थान की तरफ ले जाने लगा. जब वो संभल गयी उसने लड़के को मुस्कुरा कर कहा, "थैंक यू. बहुत अच्छा कैच किया तुमने."


ठीक उसी समय उस लड़के ने भी कहा, "तुम्हारा स्वागत है. तुम कैच करने लायक हो तो कैच किया."


सभी लोगों ने तालियां बजाना शुरू कर दी थी. वो उसको अपनी गोद में लेकर और छात्रों के साथ पंक्ति में बैठ गया था. कुछ देर बाद उसने उसको एक कुर्सी पर बैठा दिया.


वो अपनी बहन की फोटो लेने चला गया. कुछ देर बाद वो फिर आ गया और फिर से उसको अपनी गोद में उठा लिया. उसकी बहन भी आ गयी.


उसकी बहन और वो दोनों बहुत जल्दी ही एक दूसरे से घुल मिल गयी. वो उन दोनों की बातें सुनता रहा. उस समय वो दोनों ही उसके लिए दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण औरतें थी.


एक को वो बचपन से जानता था और एक का वो जीवन में अब तक इंतजार कर रहा था.


उसने कभी भी उस दिव्यांग लड़की को ये एहसास नहीं होने दिया के उसकी टांगों में कोई कमी थी.


उन दोनों की शादी हो गयी शादी के दिन उसने सबके सामने स्वीकार किया के वो उस सबसे नरम शक्तिशाली हाथों वाले से पहली नजर में ही प्रेम करने लगी थी.


वो भी बोल पड़ा था, "मैंने सोचा था के मैंने उसको गिरते हुए लपक लिया था, पर वास्तव में उसने मुझे लपक लिया था."


सभी लोग हंसने लगे थे. वो उसकी तरफ मुड़ी थी और मुस्कुरा कर उसको चूमते हुए बोली थी, "दुनिया में सबसे नरम शक्तिशाली हाथ तुम्हारे हैं."



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