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कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 28)

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कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 28)

राजा शर्मा

Copyright@2018 राजा शर्मा Raja Sharma

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कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 28)

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दो शब्द

मरने के सात दिन बाद Marne Ke Saat Din Baad

चपरासी से अरबपति Chaprasi Se Arabpati

वो प्यारा साथी Wo Pyaara Sathi

परोपकार करने वाला Paropkaar Karne Wala

कुछ देर और रुकिए Kuch Der Aur Rukiye

दुष्ट राजकुमार Dusht Rajkumar

वो एक माँ Wo Ek Maa

वो अंधी लड़की Wo Andhi Ladki

काम, रोग, और मृत्यु Kam, Rog, Aur Mrityu

आईने पर विचार Aaine Par Vichaar

माँ नहीं समझी थी Maa Nahi Samjhi Thee

सबसे सुखद बातचीत Sabse Sukhad Baatcheet

रास्ता दिखाने वाला Rasta Dikhaaney Wala

कैलीन, वो लड़की Caline, Wo Ladki

कुछ और खाओगी Kuch Aur Khaogi

मनुष्य उदार हैं Manushya Udaar Hain

देवदूत बच्चे Devdoot Bachhey

मम्मी या डैडी Mummy Ya Daddy

बीस साल बाद Bees Saal Baad

वो देवदूत ही थी Wo Devdoot Hi Thi

दूसरी माँ Doosri Maa

करोड़पति और तीन भिखारी Crorepati Aur Teen Bhikhari

अधूरी रह गयी Adhuri Rah Gayi

सन्यासियों के बीच शहरवासी Sanyasiyon Ke Beech Shaharwasi

मैं अकेली Main Akeli


दो शब्द


विश्व के प्रत्येक समाज में एक पीढ़ी द्वारा नयी पीढ़ी को कथाएं कहानियां सुनाने की प्रथा कई युगों से चलती चली आ रही है. प्रारंभिक कथाएं बोलकर ही सुनायी जाती थी क्योंकि उस समय लिखाई छपाई का विकास नहीं हुआ था. जैसे जैसे समय बीतता गया और किताबें छपने लगी, बहुत सी पुरानी कथाओं ने नया जीवन प्राप्त किया.


इस पुस्तक में हम आपके लिए 25 प्रेरणा कथाएं लेकर आये हैं. यह इस श्रंखला की अठाईसवीं पुस्तक है. हर कथा में एक ना एक सन्देश है और इन कथाओं में युवा पाठकों, विशेषकर बच्चों, के दिमाग में सुन्दर विचार स्थापित करने की क्षमता है. ये पुस्तक आपको निराश नहीं करेगी क्योंकि ये कहानियां दुनिया के विभिन्न देशों और समाजों से ली गयी हैं.


कहानियां बहुत ही सरल भाषा में प्रस्तुत की गयी हैं. आप अपने बच्चों को ऐसी कहानियां पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करके उनपर बहुत उपकार करेंगे. आइये मिलकर कथाओं की इस परम्परा को आगे बढ़ाएं.


बहुत धन्यवाद


राजा शर्मा


मरने के सात दिन बाद Marne Ke Saat Din Baad


उसने महसूस किया के कुछ गरम तरल पदार्थ उसके माथे से होता हुआ उसके गालों से नीचे जा रहा था. उसने अपने आप से पूछा,"क्या गरम बारिश हो रही है?"


उसने अपनी आंखें खोली और देखा के उसके आस पास लोग दौड़ रहे थे. ऐसा लग रहा था के सभी जल्दी में थे.


एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति (डॉक्टर) खड़ा था . उसकी सफेद मूछें थी और उसने एक लाल लाल धब्बों वाला सफेद चोगा पहन रखा था.


उसके साथ एक पुरुष (सहायक डॉक्टर) और दो स्त्रियां (नर्सें) नीले कपड़ों में थी. उनमें से एक स्त्री ने उस व्यक्ति की तरफ देखा और जोर से कुछ बोली. वो सुन नहीं सका उसने क्या कहा, परन्तु उसने महसूस किया के वो नीचे लेटा हुआ था.


उसका चेहरा गरम तरल पदार्थ के कारण गरम होता जा रहा था. उसकी कमीज गीली हो रही थी. उसको चक्कर आने लगे.


उसे ऐसे लगा के उसके आस पास सब कुछ घूम रहा था और खड़े हुए लोग धूमिल हो गए थे. एक क्षण के लिए उसके शरीर में बहुत जोर का कम्पन हुआ और उसके बाद सब सफेद हो गया.


उसके आस पास बहुत हल्ला था पर उसने कुछ नहीं सुना. लोग सभी तरफ से आ रहे थे. उसके कानो में बहुत जोर से दर्द हो रहा था.


जब एक जोर की आवाज़ हुई, उसको होश आ गया. उसने अपनी आंखें खोल कर अपने चारों तरफ देखा. उसने देखा के वो एक सफ़ेद जमीन पर था. दूर दूर तक सफेदी ही सफेदी थी.


उसके घुटनो को झाड़ियां छू रही थी. हलकी मधुर हवा चल रही थी. अचानक उसने देखा के उसकी आँखों के सामने एक नीला चित्र आ गया था. वो पिकासो का एक चित्र था.


आकाश एकदम नीला था.. वो आकाश की सुंदरता में डूब गया. अचानक एक पुरुष की आवाज़ ने उसका ध्यान भंग कर दिया.


उसके कानो में एक आवाज़ आयी, "मिस्टर जॉनसन जेन जैकब्स? २८ बरस उम्र. जन्म ११ सितम्बर, १९८०. क्या आप ही हैं?"


उसने मुड़कर देखा और पाया के एक युवक उसके पीछे खड़ा था. शायद वो सत्रह अठारह बरस का रहा होगा.


वो बहुत ही सुन्दर था. उसके भूरे बाल थे और चमकती हुई नीली आंखें थी. उसने साधारण कपडे लगाए हुए थे, एक शर्ट और नीली जींस.


उससे पूछने ही वाला था के वो कहाँ था परन्तु उस युवक ने कहा, "क्या मिस्टर जॉनसन आप ही हैं?"


उसने जवाब दिया, "हाँ मैं ही हूँ."


उस युवक ने कहा, "आज १० अप्रैल, २०१८ को आप औपचारिक तौर पर मृत घोषित किये जाते हैं."


वो उसको देखता ही रह गया और सोचने लगा के क्या वो कोई मजाक था. परन्तु वो अच्छा मजाक नहीं था.


सही में वो बिलकुल अच्छा नहीं था. कल्पना कीजिये आप अचानक ऐसे जगह अपनी आंखें खोलते हैं जहाँ कुछ भी नहीं है और अचानक एक लड़का आता है और घोषणा करता है के आप मृत घोषित किये जाते हैं.


उसको बहुत गुस्सा आया और वो अपने आप से ही प्रश्न पूछने लगा. युवक ने उसको कुछ देर देखा और फिर कहा, "आप मर चुके हैं." उसके शब्दों में कोई भावना नहीं थी. एकदम ठन्डे शब्द थे.


वो दंग होकर दो मिनट तक वहीँ खड़ा रहा. उसने अपने आप से कहा, "ये कहता है मैं मर गया हूँ. मैं इसके सामने खड़ा हूँ.

मेरा शरीर बिलकुल ठीक है और कोई घाव भी नहीं है. और मैं सांस ले रहा...." अचानक उसने महसूस किया के वो सांस नहीं ले रहा था.


उसने अपना हाथ अपनी छाती पर रखा और अपने ह्रदय की धड़कन महसूस करने लगा. कोई धड़कन नहीं थी.


उसने बहुत प्रयास किया. नहीं, कोई भी धड़कन नहीं थी. बहुत ही बुरा अनुभव था. उसको महसूस होने लगा के वो मर गया था.


उसको लगने लगा के उसके शरीर में शक्ति ही नहीं थी. उसका शरीर ढीला हो गया था. वो जमीन पर गिर गया.


नीचे जमीन नरम थी. उसने फिर से आकाश को देखा. बहुत ही सुन्दर दृश्य था. उसने अपनी आंखें बंद कर दी.


वो उन चीजों के बारे में सोचने लगा जो उसको प्यारी थी. वो सुबह की अपनी कॉफ़ी को याद करने लगा. उसको समुद्र का किनारा याद आया. उन दिनों के बारे में सोचते हुए उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी.


उसको याद आया के कैसे वो कभी सफल होता था कभी असफल और कैसे उसके दिन कभी बहुत अच्छे होते थे कभी बहुत बुरे.


कुछ दिन वो बहुत मौज करता था और कभी संघर्ष करना पड़ता था. उसको लगा के कैसा मजाक था के मरने से पहले उसने कभी महसूस ही नहीं किया था के समय कितना बहुमूल्य होता है.


वो अपने जीवन के बारे में सोचते सोचते एकदम शांत हो गया और उसकी आँखों से आंसू गिरने लगे. वो वास्तव में ही मर गया था. वो तो सात दिन पहले ही मर गया था.


मित्रों,


इस कथा का तात्पर्य सिर्फ ये बताना है के मानव जीवन अमूल्य होता है और समय बहुमूल्य.


अपने जीवन काल में हमको समय का सदुपयोग करना चाहिए नहीं तो अंतिम समय में सिर्फ पश्चाताप और आंसू ही रह जाते हैं. मरते समय चेहरे पर मुस्कान हो तो माना जायेगा के जीवन सफल था.


चपरासी से अरबपति Chaprasi Se Arabpati


ये रोबर्ट कोउक के एक चपरासी से दक्षिण पूर्व एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बनने की अविश्वसनीय कहानी है.


रोबर्ट कोउक हॉक नैन का जनम ६ अक्टूबर १९२३ के दिन जोहोर में जोहोर बरहु में हुआ था.


उनका जन्म एक चाइनीस माता पिता के घर में हुआ था जो बीसवीं शताब्दी में मलेशिया में बस गए थे. उनके पिता जी जरूरत की चीजों का व्यापार करते थे.


रोबर्ट कोउक ने अपनी स्कूल की शिक्ष सिंगापुर के रैफल्स इंस्टीटूशन से पूरी की थी. फिर उन्होंने स्नातक तक की पढाई की.


पढाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक दफ्तर में चपरासी के रूप में काम करना शुरू कर दिया, पर बाद में उन्होंने चीनी, चावल, और गेहूं बेचने खरीदने का काम शुरू कर दिया.


लगभग तीन बरस तक लोगों के साथ मिलकर छोटे मोटे व्यापार करने के बाद उन्होंने अपना व्यापार स्थापित किया और कोउक ब्रदर्स नाम से काम शुरू किया. उन्होंने चीनी बनाने के उद्योग में थोड़े थोड़े पैसे लगाने शुरू कर दिए.


१९५७ में मलेशिया ने स्वतंत्रता प्राप्त कर ली. कोउक ने अपना व्यापार धीरे धीरे बढ़ाना शुरू कर दिया. कुछ ही वर्षों में उनका पूरे देश के अस्सी प्रतिशत चीनी व्यापार पर नियंत्रण हो गया. वो भारत से चीनी खरीदते थे और मलेशिया में बेचा करते थे.


उनका चीनी के व्यापार पर नियंत्रण देखते हुए लोग उनको एशिया में चीनी का राजा कहने लगे. कोउक के आगे के जीवन में उनको सफलता ही सफलता प्राप्त होती रही.


१९७१ में कोउक ने सिंगापुर में पहले शांगरी ला होटल का निर्माण किया. फिर अगले वर्ष ही उन्होंने कोव्लून शांगरी ला होटल की स्थापना की.


कोउक की कंपनी ने रुपर्ट मुर्डोक की कंपनी न्यूज़ कारपोरेशन साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के लगभग चालीस प्रतिशत हिस्से को खरीद लिया.


१९९३ में उन्होंने कंपनी के काम काजों से स्वयं को अलग कर लिया और होन्ग कोंग में रहने लगे. होन्ग कोंग की सरकार ने भी उनको अपने प्रतिनिधि के रूप में सम्मान दिया.


कोउक समूह ने मलेशिया में अपने दो चीनी उद्योग तीन सौ पैंसठ मिलियन डॉलर में बेच दिए हैं.


20११ में फोर्बेस मैगज़ीन ने कोउक को दुनिया का इक्सठवां सबसे अमीर व्यक्ति घोषित किया था. उनकी चल अचल संपत्ति साढ़े बारह बिलियन डॉलर थी.


रोबर्ट कोउक आज मलेशिया में बहुत सी कंपनियों और उद्योगों के मालिक हैं.


उनके उद्योग धंधे फिजी, सिंगापुर, फिलीपींस, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मेनलैंड, और चीन में भी फैले हुए हैं. वो कोका कोला की दस बॉटलिंग फैक्टरियों के भी मालिक हैं.


वो चीन में बीजिंग वर्ल्ड ट्रेड सेण्टर के मालिक भी हैं. उनके गन्ने के खेत, चीनी की मिलें, तेल की कम्पनियाँ, बैंक, व्यापार, खनिज कम्पनियाँ, यातायात कम्पनियाँ, जमीन जायदादें, और प्रकाशन कंपनियां पूरे एशिया में फ़ैली हुई हैं.


चीन और भारत के बीच माल को लाने लेजाने वाली कंपनी ट्रेनस्माइल ग्रुप के भी वो मालिक हैं. उनकी मलेशिया इंटरनेशनल शिपिंग कारपोरेशन में भी हिस्सेदारी है.


कोउक ने अकेले ही धीरे धीरे हर कदम पर छोटे छोटे व्यापार शुरू करके इतनी अपार सफलता प्राप्त की है. उनकी सफलता में उनकी लगन, संकल्प, और दृढ इच्छाशक्ति स्पष्ट दिखती है.


वो प्यारा साथी Wo Pyaara Sathi


एक छोटा बच्चा गली के कोने में खड़ा था. गली के एक तरफ लकड़ी के फट्टों की एक छोटी सी दीवार सी बनी थी. वो बच्चा उस दीवार का सहारा लेकर अपने एक पैर के जूते से जमीन पर पड़े छोटे छोटे कंकड़ों को उड़ा रहा था.


सामने की सड़क पर कुछ धूल उड़ाते हुए ट्रक चले जा रहे थे. कुछ ही देर में एक छोटा सा भूरे रंग का कुत्ता गली में दिखाई दिया. उसके गले में एक छोटी सी रस्सी बंधी हुई थी.


वो बेचारा कभी कभी उस रस्सी में उलझ जाता था और चलने में कठिनाई होती थी. वो छोटा बच्चा अपनी स्वप्निल आँखों से उस छोटे कुत्ते को देख रहा था.


वो छोटा कुत्ता उस छोटे बच्चे के सामने ही रुक गया और दोनों एक दूसरे को ध्यान से देखने लगे. कुत्ता थोड़ा सा हिचकिचाया पर फिर वो अपनी पूँछ हिलाने लगा.


बच्चे ने अपना हाथ उस कुत्ते की तरफ बढाकर पुचकारना शुरू किया. कुत्ता धीरे धीरे उसकी तरफ आने लगा.


बच्चे ने उस कुत्ते की पीठ पर हाथ फेरना शुरू किया और कुत्ता पूँछ हिलाकर और उस बच्चे के हाथ को चाट कर अपनी प्रतिक्रिया दिखाने लगा. कुछ देर में ही कुत्ता पूरे जोश में आ गया और अपनी ख़ुशी व्यक्त करने लगा.


अचानक छोटे बच्चे को ऐसा लगा के कुत्ता खतरनाक होता जा रहा था, उसने कुत्ते के सर पर एक हलकी सी चपत लगा दी.

बेचारा छोटा सा बेजुबान प्राणी हैरान हो गया और उसका दिल दुःख गया. वो दुखी होकर बच्चे के पैरों के पास ही बैठ गया.


जब बच्चे ने उसको एक और चपत लगाई और बच्चे की जुबान में उसको गुस्सा किया तो कुत्ता पीठ के बल लेट गया और अपने पंजे ऊपर की तरफ उठा दिए. ऐसा लग रहा था जैसे वो अपने चारों पैर उठाकर बच्चे से प्रार्थना कर रहा था.


कुत्ते को इस तरह पीठ पर लेटा देखकर बच्चा हंसने लगा. वो बार बार उस कुत्ते को चपत लगाने लगा ताकि वो छोटा कुत्ता पीठ पर लेटने का खेल उसको दिखाता रहे.


शायद कुत्ते को उस पिटाई के कारण लग रहा था के उसने कोई अपराध किया था और वो पीठ के बल लेट कर माफ़ी मांग रहा था.


जब वो छोटा बच्चा कुत्ते के साथ खेलते खेलते थक गया वो घर की तरफ चल दिया. कुत्ता उठकर बैठ गया और दूर जाते हुए बच्चे को देखता रहा.


कुछ देर बाद वो कुत्ता अपने पैरों पर खड़ा हो गया और उस बच्चे के पीछे पीछे चल दिया. बच्चा भी मुड़कर देख रहा था के कुत्ता उसका पीछा कर रहा था.


बच्चे को रास्ते में एक छोटी सी छड़ी मिल गयी. उसने उस छड़ी से कुत्ते को डराने का प्रयास किया. कुत्ता फिर से पीठ के बल लेट गया और अपने पंजे ऊपर उठा दिए.


ऐसा लग रहा था के वो फिर से प्रार्थना कर रहा था. बच्चा फिर से चल दिया और कुत्ता उसके पीछे चल दिया.


घर जाते समय वो बच्चा बहुत बार रुका और उसने बहुत बार उस छोटे कुत्ते को धमकाया परन्तु हर बार उस कुत्ते ने पीठ के बल लेटकर उससे प्रार्थना कर दी. अंत में वो बच्चा अपने घर के दरवाजे तक पहुँच गया. कुत्ता कुछ ही दूरी पर था.


कुत्ता बच्चे के साथ खेलने में इतना मग्न हो गया था के उसको अपने गले में बंधी हुई रस्सी पूरी तरह भूल चुकी थी. अचानक उसका एक पैर रस्सी में उलझ गया और वो लड़खड़ा गया.


बच्चा घर के सामने की सीढ़ियों पर बैठ गया. कुत्ता फिर से उसको खेल दिखाने लगा. अचानक बच्चे ने उसकी रस्सी अपने हाथ में ले ली.


बच्चा उस कुत्ते को रस्सी से खींच कर अंदर ले गया और एक अँधेरे कच्चे कमरे में घुसा दिया. कुत्ता सीढ़ियां नहीं चढ़ सक रहा था. वो बहुत डर गया.


जब उसको लगा के उसको अँधेरे कमरे में बंद किया जाने वाला था, उसने रस्सी को पीछे खींचना शुरू कर दिया और आगे बढ़ने से इंकार कर दिया.


बच्चा जोर लगाकर उसकी रस्सी को खींचने लगा. सीढ़ियों पर एक प्रकार का युद्ध था वो बच्चे और छोटे कुत्ते के बीच में. अंत में बच्चा जीत गया. बेचारा कुत्ता बहुत ही छोटा था.


घर के अंदर कोई नहीं था. कुत्ता उसके पास ही बैठ गया. कुछ देर में दोनों फिर से खेलने लगे


जब परिवार के लोग घर आये, सभी ने हल्ला करना शुरू कर दिया. सभी ने एक एक करके कुत्ते का परीक्षण किया. सभी उसको दुत्कारने लगे. बच्चा कुत्ते के पक्ष में खड़ा हो गया. अंत में परिवार के मुखिया, पिताजी,आ गए.


सभी ने मिल कर माँ बाप से शिकायत की के वो शरारती बच्चा उस कुत्ते को घर में ले आया था. सभी ने कहा के वो अच्छा कुत्ता नहीं था. सभी सदस्य बैठ कर चर्चा करने लगे. पिताजी काम के कारण बहुत थके हुए थे.


उन्होंने उस बच्चे को वो कुत्ता रखने की अनुमति दे दी. बच्चा धीरे धीरे रो रहा था. वो अपने दोस्त को लेकर एक कमरे में चला गया. उसके पिताजी उसकी माँ से झगड़ रहे थे.


उस दिन के बाद वो छोटा कुत्ता भी परिवार का सदस्य बन गया. बच्चा और छोटा कुत्ता हमेशा ही साथ देखे जाने लगे. सिर्फ सोने के समय ही वो अलग अलग होते थे. बच्चा एक प्रकार से उस कुत्ते का अभिभावक बन गया था.


घर के अन्य सदस्यों को जब वो कुत्ता अकेला दिख जाता था वो उसको कभी लात मार देते थे कभी झाड़ू या छड़ी से डराते थे, परन्तु उस बच्चे के सामने किसी की ऐसी हिम्मत नहीं होती थी.


जब भी बच्चे को मालूम होता था के कुत्ते को किसी ने मारा था वो रोने लगता था. उसके पिता बच्चे का समर्थन में थे.


अब वो बच्चा हमेशा तो उस छोटे कुत्ते के साथ नहीं रह सकता था.


जब वो कुत्ता अकेले अपने कोने में बैठा होता था वो अपनी अनूठी आवाज में शायद उस बच्चे को बुलाता था और रोता था. जब वो इस तरह रोता था, घर के सदस्य अक्सर उसको पीट देते थे


कभी कभी जब उस बच्चे की भी घर के लोगों के द्वारा पिटाई हो जाती थी, वो अपने कुत्ते की पीठ पर सर रखकर रोता था. छोटा कुत्ता उसको बहुत सहारा देता था.


घर के लोग उस कुत्ते को कम खाना देते थे, परन्तु वो बच्चा उसको बहुत सी चीजें ला ला कर खिलाता रहता था.


धीरे धीरे वो कुत्ता बड़ा होने लगा और उस बच्चे से उसका संबंध और भी घनिष्ट होने लगा. परन्तु बाहर गली के और कुत्ते उसके लिए खतरा हो गए थे.


वो बच्चा घर के आस पास के इलाकों में खूब घूमता था और वो कुत्ता हमेशा उसके साथ रहता था. अगर कोई और कुत्ता उस बच्चे के पास आने की कोशिश करता था तो बच्चे का कुत्ता गुर्रा कर उसको भगा देता था.


एक दिन, उस बच्चे के पिताजी बहुत ही नशे में थे. वो जब घर आये उन्होंने हो हल्ला करना शुरू कर दिया. वो माँ से झगड़ा कर रहे थे. ठीक उसी समय वो बच्चा और उसका भूरा साथी घर में आ गए. वो कहीं दूर घूम कर वापिस लौटे थे.


बच्चे को तुरंत ही पता चल गया के उसके पिताजी किस हालत में थे. वो डर कर एक मेज के नीचे घुस गया. उसको मालूम था के पिताजी के क्रोध से बचने का वही सबसे अच्छा स्थान था.


कुत्ते को उन परिस्थितियों के बारे में कुछ नहीं पता था. उसने बच्चे को मेज के नीचे घुसते देखा. वो भी अपने दोस्त के पास जाना चाहता था और इधर उधर कूदने लगा.


ठीक उसी समय पिताजी ने उसको देख लिया. उन्होंने एक भारी बर्तन उठाकर उस कुत्ते पर दे मारा. बेचारा कुत्ता छुपने का स्थान खोजने लगा.


पिताजी ने उसको एक लात मार दी और वो बेचारा हवा में उछल गया. फिर से एक भारी बर्तन उस कुत्ते को लगा.


ठीक उसी समय बच्चा रोता हुआ मेज के नीचे से बाहर आया, परन्तु उसके पिताजी को तो उस बेचारे कुत्ते को नशे में मारने में मजा आ रहा था. वो बेचारा पीठ के बल लेट गया और अपने पंजे उठा दिए जैसे ना मारने की प्रार्थना कर रहा था.


पिताजी ने नशे में चूर उस बेचारे कुत्ते को एक टांग से पकड़ कर उठाया और तीन बार घुमा कर खिड़की से बाहर फेंक दिया.


बच्चा रोता हुआ घर से नीचे जाने की सीढ़ियां उतरने लगा. बाहर बहुत से लोग इकट्ठे हो गए थे. सभी लोग अपने अपने विचार रख रहे थे.


कुछ देर बाद वो छोटा बच्चा अपने भूरे दोस्त के शरीर के ऊपर अपना सर लगा कर रो रहा था. उसका मित्र उससे बहुत दूर चला गया था.


मित्रों,


हम आप से हाथ जोड़ कर विनती करते हैं के अगर आप अन्य जीवों के लिए कुछ कर नहीं सकते तो कम से कम उनपर अत्याचार कभी भी मत कीजिये.


बेचारे बेजुबान जानवर आपसे प्रेम करते हैं परन्तु वो बोल नहीं सकते. उनको भी दर्द होता है और मार खाकर भी वो आपके वफादार ही रहते हैं.


कृपया अपने आस पास के जानवरों को भी प्राणी मानकर प्रेम करना सीखिए और इस दुनिया को ये प्रमाणित कर दीजिये के आप सर्वश्रेष्ठ प्राणी हैं.


परोपकार करने वाला Paropkaar Karne Wala


रात का समय था और वो बिलकुल अकेला था. उसने शहर के चारों ओर बनी दीवारों को देखा और फिर उस शहर की तरफ चल दिया.


जब वो शहर के पास आया उसने ख़ुशी से नाचते हुए पैरों की आवाजें, हंसने की आवाजें, और बहुत से वाद्य यंत्रों की आवाजें सुनी. उसने शहर के मुख्य द्वार को खटखटाया और कुछ द्वारपालों ने द्वार खोल दिया.


उसने संगमरमर का एक सुन्दर घर देखा. घर के सामने के भाग में बहुत से खूबसूरत संगमरमर के ऊँचे ऊँचे खम्बे थे. उन खम्बों को फूलों और मालाओं से सजाया गया था. हर तरफ खूबसूरत चीजें सजाई गयी थी.


चलते चलते वो एक हाल में प्रवेश कर गया. वहां बहुत से लोग थे और मनोरंजन हो रहा था. एक बड़े से हाल में भोज का आयोजन हो रहा था.


एक बड़े से सोफे पर एक युवक बैठा था. उसके सर पर लाल गुलाबों का मुकुट था और उसके होंठ लाल वाइन पीने के कारण लाल हो चुके थे.


वो आगे बढ़ा और उस युवक से पूछा, "तुम इस तरह से जीवन क्यों बिताते हो?"


वो युवक मुड़ा. उसने आगंतुक को पहचान लिया और कहा, "एक समय में मैं एक कुष्टरोगी था. आपने ही तो मेरा उपचार किया था. नहीं तो मैं कैसे जीवित रहता?"


वो उस बड़े से घर से निकल कर सड़क पर आ गया. कुछ दूरी पर उसने एक औरत को देखा जिसके चेहरे और शरीर के अन्य अंगों पर रंग लगा हुआ था और उसने मोतियों से बने जूते पहने थे.


उस औरत के पीछे एक शिकारी जैसे एक युवक आ रहा था. उस युवक ने दो रंगों का एक कोट पहन रखा था.


उस औरत का चेहरा एक मूर्ती की तरह गोरा और सुन्दर था. उस युवक की आंखें काम वासना के कारण चमक रही थी.


उसने आगे बढ़कर उस युवक को छू लिया और कहा, "तुम उस स्त्री को इस तरह से क्यों देख रहे हो?"


वो युवक उसकी तरफ मुड़ा और उसको पहचान लिया. उसने कहा, "एक समय में मैं अँधा था, आपने ही मुझको आंखें दी थी. अब मैं और किस चीज़ को देखूं?"


उसने फिर उस स्त्री को छू कर कहा, "क्या इस पापपूर्ण ढंग के अलावा सडकों पर चलने का कोई और तरीका नहीं है?"


उस औरत ने मुड़कर उसकी तरफ देखा और उसको पहचान लिया. वो बोली, "लेकिन आपने ही तो मेरे पापों को माफ़ किया था. इस तरीके से सड़कों पर चलने में आनंद आता है."


वो शहर से बाहर आ गया. एक जगह पर एक सड़क के किनारे उसने एक युवक को देखा. वो युवक रो रहा था. उसने उस युवक को छू कर कहा, "तुम रो क्यों रहे हो?"


युवक ने मुड़कर उसको देखा और उसको पहचान लिया. उसने कहा, "मैं तो मर चुका था परन्तु आपने ही तो मुझे जीवित किया था. अब मैं रोऊँ नहीं तो क्या करूँ?"


वो उस युवक से दूर होते चला गया. वो मुस्कुराने लगा और स्वयं से ही बोला, "ये मनुष्य भी मैंने बहुत ही अजीब प्रजाति बनायी है. मैं इनके लिए इतना सबकुछ करता हूँ पर फिर भी ये लोग पूर्ण नहीं होते हैं.


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