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कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 26)

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कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 26)

राजा शर्मा

Copyright@2018 राजा शर्मा Raja Sharma

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कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 26)

Copyright

दो शब्द

न्याय की घंटी Nyay Ki Ghanti

कथा जिसका अंत न हो Katha Jiska Ant Na Ho

मैं गाऊं गीत ख़ुशी के Main Gaun Geet Khushi Ke

विजेता विलियम के बेटे Vijeta William Ke Bete

सोलह दिनों का राजा Solah Dino Ka Raja

हक़ की बात Haq Ki Baat

रेगुलस का वादा Regulus Ka Vada

विलियम टेल की कहानी William Tell Ki Kahani

डेमॉक्लीस की तलवार Damocles Ki Talwaar

हाथ में हाथ Hath Mein Hath

आओ एक कप चाय पी लो Aao EK Cup Chai Pee Lo

वो सिपाही Wo Sipahi

कन्फ्यूशियस और शिष्य Confucius Aur Shishya

मैं ही बुरा था Main Hi Bura Tha

सोने के दिल वाला Soney Ke Dil Wala

प्यार में सीखा Pyar Mein Seekha

साठ साल बाद Saath Saal Baad

आप क्यों नहीं आये? Aap Kyon Nahi Aaye?

प्यार की खोज Pyar Ki Khoj

इंसानियत अभी बाकी है Insaniyat Abhi Baki Hai

वो टैक्सी वाला Wo Taxi Wala

बिकने के लिए Bikney Ke Liye

बदले की राख Badley Ki Raakh

घर तो घर होता है Ghar To Ghar Hota Ha

अनजाना हाथ (सत्य घटना) Anjana Hath



दो शब्द


विश्व के प्रत्येक समाज में एक पीढ़ी द्वारा नयी पीढ़ी को कथाएं कहानियां सुनाने की प्रथा कई युगों से चलती चली आ रही है. प्रारंभिक कथाएं बोलकर ही सुनायी जाती थी क्योंकि उस समय लिखाई छपाई का विकास नहीं हुआ था. जैसे जैसे समय बीतता गया और किताबें छपने लगी, बहुत सी पुरानी कथाओं ने नया जीवन प्राप्त किया.


इस पुस्तक में हम आपके लिए 25 प्रेरणा कथाएं लेकर आये हैं. यह इस श्रंखला की छब्बीसवीं पुस्तक है. हर कथा में एक ना एक सन्देश है और इन कथाओं में युवा पाठकों, विशेषकर बच्चों, के दिमाग में सुन्दर विचार स्थापित करने की क्षमता है. ये पुस्तक आपको निराश नहीं करेगी क्योंकि ये कहानियां दुनिया के विभिन्न देशों और समाजों से ली गयी हैं.


कहानियां बहुत ही सरल भाषा में प्रस्तुत की गयी हैं. आप अपने बच्चों को ऐसी कहानियां पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करके उनपर बहुत उपकार करेंगे. आइये मिलकर कथाओं की इस परम्परा को आगे बढ़ाएं.


बहुत धन्यवाद


राजा शर्मा


न्याय की घंटी Nyay Ki Ghanti


इटली में एक अट्री नाम का छोटा सा शहर है. ये एक बहुत ही पुराना शहर है. शहर एक पहाड़ी की एक तरफ बना हुआ है.


बहुत समय पहले, अट्री का राजा एक बहुत बड़ी घंटी शहर में ले कर आये. उन्होंने उस घंटी को शहर के केंद्र में एक ऊँचे से स्थान पर लटकाने का आदेश दिया.


घंटी को ऊपर लटका देने के बाद एक रस्सी उस घंटी से बाँध कर नीचे तक लटका दी गयी. एक छोटा बच्चा भी उस रस्सी को खींच कर उस घंटी को बजा सकता था.


राजा ने जनता के सामने घोषणा की, "ये न्याय की घंटी है."


घंटी को शहर के केंद्र में लटका देने के बाद एक समारोह का आयोजन किया गया. स्त्री पुरुष और बच्चों ने सभी ने उस समारोह में भाग लिया.


घंटी देखने में बहुत ही सुन्दर थी. सूरज के प्रकाश में वो चमक रही थी. सभी लोग उस घंटी की आवाज़ सुनना चाहते थे.


जब राजा शहर के केंद्र में स्वयं आये, लोगों ने सोचा के राजा उस घंटी को बजायेंगे. सभी लोग चुप चाप खड़े होकर प्रतीक्षा करने लगे. राजा ने तो घंटी की रस्सी को हाथ तक नहीं लगाया. राजा ने अपना एक हाथ ऊपर कर दिया.


राजा ने बोलना शुरू किया, "मेरी प्यारी प्रजा, आप सभी लोग इस सुन्दर घंटी को देख रहे हैं. ये घंटी सिर्फ नितांत आवश्यकता की स्तिथि में ही बजेगी.


यदि तुम में से किसी के साथ कुछ अन्याय होता है तो वो व्यक्ति आकर इस घंटी को बजा सकता है. सभी न्यायधीश उसकी बात सुनेंगे और उसको न्याय देंगे.


अमीर, गरीब, छोटे, ;बड़े, सभी लोग न्याय मांग सकते हैं. किसी के साथ कुछ भी भेदभाव नहीं होगा. लेकिन इस घंटी को तभी बजाना है जब पूर्ण विश्वास हो के अन्याय हुआ है.


कई वर्षों के दौरान उस घंटी को बहुत से लोगों ने न्याय मांगने के लिए बजाया. और सभी को न्याय मिला. कई अपराधियों को दंड भी मिला. वर्षों के प्रयोग के बाद घंटी की रस्सी पुरानी हो गयी और कमजोर हो गयी.


रस्सी के नीचे का भाग तो बिलकुल ही खराब हो गया था. रस्सी नीचे से टूट टूट कर थोड़ी छोटी भी हो गयी थी. अब सिर्फ लम्बे लोग ही घंटी बजा सकते थे.


न्यायधीशों ने एक दिन कहा, "अगर किसी बच्चे के साथ अन्याय हुआ तो वो बेचारा तो इस डोरी तक पहुँच ही नहीं सकेगा. और वो कभी भी घंटी नहीं बजा सकेगा.


इस रस्सी के स्थान पर लम्बी रस्सी लगानी होगी ताकि वो रस्सी जमीन छू सके और एक छोटा बच्चा भी घंटी बजा सके."


सभी ने बहुत तलाश की परन्तु पूरे शहर में लम्बी रस्सी ही नहीं मिली.


अंत में एक आदमी अपने बगीचे से फूलों और पत्तियों से लदी हुई एक हरी लता ले आया और उसको टूटी हुई रस्सी के नीचे के भाग में बाँध दिया. रस्सी के निचले भाग से बंधी हुई वो लता जमीन छूने लगी.


शहर के पास के एक पर्वत में एक बूढा योद्धा रहता था. जवानी में उसने बहुत से युद्ध लड़े थे परन्तु अब वो बूढा हो गया था. उसके पास एक शानदार घोडा भी था.


बुढ़ापे में वो योद्धा कंजूस हो गया था उसने अपनी सभी चीजें बेचकर पैसे इकट्ठे कर लिए. वो एक छोटी सी झोपडी में रहने लगा और अपने पैसों की निगरानी करने लगा.


उसने घोड़े को भी कम खाना देना शुरू कर दिया. भूख के कारण वो घोडा कमजोर होने लगा. एक दिन उसने सोचा के घोडा तो उसका दाना खाता है और पैसे खर्च होते हैं.


उसने घोड़े को बेचने का विचार किया. कोई भी उस कमजोर घोड़े को खरीदने को तैयार नहीं हुआ. वो बूढा कंजूस उस घोड़े के मरने की कामना करने लगा.


उसने घोड़े को खुला छोड़ दिया. बेचारा घोडा पहाड़ पर इधर उधर भटकने लगा. कहीं पर थोड़ी घास मिल जाती थी तो वो खा लेता था अन्यथा वो भूखा ही रहता था.


छोटे बच्चे उसको पत्थर मारते थे. कुत्ते उसपर भौंकते थे और कोई भी उसपर दया नहीं दिखाता था.


एक गर्मी के दिन वो खाने की तलाश में भटकते भटकते शहर के केंद्र में आ पहुंचा. उसने घंटे से लटकती हरी भरी लता देखी. वो हरी हरी पत्तियों को खाने लगा. रस्सी हिलने के कारण घंटी बजने लगी.


शहर के लोगों और न्यायाधीशों ने घंटी की आवाज़ सुनी और सभी लोग शहर के केंद्र की तरफ आने लगे. सबने पहचान लिया के वो कंजूस का घोडा था. वो सब जानते थे के कंजूस उसको खाना नहीं देता था.


एक व्यक्ति ने कहा, "ये घोडा न्याय की मांग करने आया है."


दूसरे ने कहा, "इसको भी न्याय मिलेगा."


न्यायाधीशों ने कंजूस को बुलाकर कहा, "इस घोड़े ने वर्षों तुम्हारी सेवा की और हर युद्ध में तुमको अपनी पीठ पर बैठाकर तुमको विजेता बनाया. इसने बहुत बार तुमको खतरों से भी निकाला था. इसके कारण ही तुम इतने अमीर हो सके.


हमारा आदेश है के तुम्हारी संपत्ति और पैसे में से आधा इस घोड़े को दे दिया जाये ताकि इसके लिए जीवन भर खाना खरीदा जा सके.


इसके लिए एक हरा भर मैदान खरीदा जाए जहाँ ये चर सके और दौड़ सके. इसके बुढ़ापे को आरामदायक बनाया जाए."


जनता ने मिलकर घोड़े की देखभाल के लिए कुछ लोगों की एक समिति बना दी और उस बूढ़े कंजूस योद्धा की आधी संपत्ति ले ली.


उन्होंने घोड़े के लिए एक नया और आरामदायक अस्तबल बनाया और उसके खाने पीने का भी इंतजाम कर दिया.


आज भी वो न्याय की घंटी उस शहर के केंद्र में देखी जा सकती हैं हालाँकि अब उस घंटी का व्यावहारिक प्रयोग नहीं है.


हर वर्ष हज़ारों लोग इटली के उस छोटे से शहर में उस घंटी को देखने जाते हैं और उससे सम्बंधित कहानियां सुनते हैं.


मित्रों,


पुराने समय में कुछ राजा ऐसे भी हुए हैं जिनके न्याय की प्रशंसा अभी तक होती है. वो मनुष्यों को ही नहीं जानवरों को भी निष्पक्ष न्याय प्रदान करते थे. अगर आपके पास भी कोई पालतू जानवर हैं तो कृपया उनका बहुत ध्यान रखियेगा.


कथा जिसका अंत न हो Katha Jiska Ant Na Ho


सुदूर पूर्व के एक देश में एक बहुत ही शक्तिशाली राजा था. उसके पास करने के लिए कुछ काम नहीं था.


वो दिन भर नरम नरम तकियों का सहारा लिए बैठकर कथाएं सुनता रहता था. चाहे उसको कोई भी कहानी सुनाते रहिये वो कभी भी थकता नहीं था.


उसको सिर्फ एक ही शिकायत रहती थी के कहानियां छोटी होती थी और जल्दी ही अंत हो जाती थी. वो दुनिया भर के कोने कोने से कहानीकारों को बुलाता रहता था और उनसे कहानियां सुनता था.


वो उनको कहता था के उसको लम्बी लम्बी कहानियां सुनाएं. जब भी एक कथा अंत हो जाती थी, वो बहुत ही दुखी हो जाता था.


एक बार उसने घोषणा की के वो उस कथाकार को बहुत सा पुरुस्कार देगा जो कहानीकार उसको ऐसी कहानी सुनाएगा जो कभी अंत ही ना हो.


उसने कहा, "अगर कोई कथाकार मुझे अंत ना होने वाली कहानी सुनाएगा, उसको मैं अपनी बेटी दे दूंगा और मैं उसको अपना उत्तराधिकारी भी बना दूंगा. मेरे बाद वही राजा बनेगा."


साथ में राजा ने ये भी शर्त रख दी, "अगर कोई कथाकार कभी ना अंत होने वाली कथा सुनाने में असफल रहा तो उसका सर काट लिया जाएगा."


राजा की बेटी बहुत ही सुन्दर थी और बहुत से नवयुवक उसको अपनी पत्नी के रूप में प्राप्त करना चाहते थे परन्तु वो मृत्यु दंड से भी डरते थे.


एक नवयुवक ने एक कहानी शुरू की और वो कहानी तीन महीने तक चली परन्तु उसके बाद वो कुछ सोच नहीं सका. उसको मृत्यु दंड दे दिया गया.


एक दिन दक्षिण से एक अजनबी उस देश में आया और राजा के दरबार में हाज़िर हुआ. उसने राजा से कहा, "मेरे पास एक बहुत ही रुचिकर कहानी है. मेरी कहानी टिड्डियों के बारे में है. अगर आप कहें तो मैं अपनी कहानी सुनाना शुरू कर दूँ."


राजा ने उसको कहानी सुनाने को कहा. उसने कहानी सुनाना शुरू कर दी, "एक बार एक राजा ने अपने राज्य के सम्पूर्ण मकई के खेतों पर कब्ज़ा कर लिया और मकई की फसल कटवा कर अपने अन्न भण्डार या कोठार में रखवा दी.


एक दिन टिड्डियों का एक बहुत बड़ा समूह आकाश में दिखा क्योंकि उन्होंने उस अन्न भण्डार का पता लगा लिया था.


उन्होंने अन्न भण्डार के एक हिस्से में एक छेद देखा जहाँ से वो अन्न भण्डार में घुसना शुरू हो गयी. एक एक करके टिड्डियाँ अंदर जाने लगी और अन्न के दाने लेकर बाहर निकलने लगे."


वो अजनबी कई हफ़्तों तक यही कहता रहा, "टिड्डियों ने अन्न भंडार में घुस कर अनाज ले जाना जारी रखा. ये क्रम निरंतर ही चलता रहा."


वो अजनबी एक महीने तक यही कहता रहा. इसी तरह दो बरस का समय बीत गया और कथा अंत नहीं हुई. राजा ने कहा, "ये टिड्डियाँ और कितने दिनों तक अन्न भण्डार में से अन्न के दाने निकाल कर ले जाती रहेंगी?"


उस अजनबी ने कहा, "मेरे राजा, अभी तो टिड्डियों ने गोदाम का एक हिस्सा ही खाली किया है. ऐसे तो हजारों गोदाम राजा ने बनवा रखे हैं.


कोई नहीं कह सकता के टिड्डियाँ कब तक अन्न चुराती रहेंगी? हमारी कहानी तो यही कहती रहेगी के अंदर घुसती हैं और अनाज के दाने चुरा कर ले जाती हैं. मैं नहीं जानता कब तक चलेगा ये सब."


राजा ने जोर से कहा, "बस करो ये सब! मैं पागल हो जाऊँगा. दो बरस से तुम्हारी टिड्डियाँ अनाज ही चुरा रही हैं. अब मैं आगे नहीं सुन सकता तुम मेरी बेटी के पति बन सकते हो.


मेरे उत्तराधिकारी बन सकते हो और मेरे बाद मेरे राज्य के राजा भी बन जाना. परन्तु, अब इन टिड्डियों की कहानी को आगे मत सुनाना!"


उस अजनबी ने राजा की बेटी से विवाह कर लिया और शाही महल में ही रहने लगा. राजा ने कहानियां सुनना बंद कर दिया.


मित्रों,


कभी कभी कुछ सनकी शासक अपनी ऐसी ही हरकतों से लोगों को बहुत दुःख देते हैं, परन्तु आज नहीं तो कल कोई ऐसा व्यक्ति आ ही जाता है जो उस शासक को पाठ सिखा जाता है.


मैं गाऊं गीत ख़ुशी के Main Gaun Geet Khushi Ke


एक समय में इंग्लैंड में डी नदी के किनारे एक पनचक्की का मालिक अपने घर में बहुत ही सुख से रहता था.


उसकी चक्की नदी के पानी से चलती थी और गेंहू, मकई, और अन्य चीज़ें पीसती थी. लोग कहते थे के उस चक्की के मालिक से ज्यादा खुश व्यक्ति कोई भी नहीं था.


वो सुबह से शाम तक काम में व्यस्त रहता था और काम करते करते गीत गाता रहता था. उसको ख़ुशी ख़ुशी गीत गाते देखकर उसकी चक्की में आने वाले ग्राहक भी बहुत ही खुश रहते थे.


वो सभी को खुश कर देता था. पूरे देश में लोग उसके बारे में बातें करते थे. अंत में ये बात देश के राजा तक भी पहुंच गयी.


राजा ने कहा, "मैं एक दिन स्वयं जाकर उस चक्की के मालिक से बात करूंगा और हो सकता है के वो मुझे भी खुश रहने का कोई तरीका बता दे."


कुछ दिन बाद राजा उस चक्की के मालिक के पास पहुँच ही गया. चक्की का मालिक गीत गा रहा था:


ना मैं किसी से जलता हूँ

ना कोई मुझसे जलता है

मैं हँसता जाता रहता हूँ

सबको ये अच्छा लगता है


राजा ने कहा, "नहीं मेरे दोस्त, तुम गलत कह रहे हो! मैं तुमसे ईर्ष्या करता हूँ. मैं तो ख़ुशी ख़ुशी तुम्हारा स्थान लेने को तैयार हो जाऊँगा. मैं राज गद्दी छोड़कर चक्की का मालिक बनना चाहूंगा."


चक्की का मालिक मुस्कुराने लगा और उसने झुक कर राजा को नमस्कार किया. उसने कहा, "महाराज, मैं अपना काम छोड़कर राजा बनने का तो विचार भी नहीं कर सकता."


राजा ने कहा, "मैं ये जानना चाहता हूँ के तुम इतनी धूल भरी चक्की में काम करते हुए भी खुश कैसे रहते हो, जबकि मैं एक राजा होकर भी हर दिन समस्याओं से घिरा रहता हूँ और चिंता में डूबा रहता हूँ."


चक्की के मालिक ने मुस्कुरा कर कहा, "मैं ये तो नहीं जानता के आप क्यों दुखी हैं, परन्तु मैं आपको ये अवश्य बता सकता हूँ के मैं कैसे खुश रह सकता हूँ.


मैं अपनी रोटी कमाता हूँ, मैं अपनी पत्नी और बच्चों से प्रेम करता हूँ, मैं अपने मित्रों से प्रेम करता हूँ, और वो भी मुझे प्रेम करते हैं, मैं किसी का एक पैसे का भी ऋणी नहीं हूँ, तो मुझे खुश क्यों नहीं रहना चाहिए?


ये सामने नदी है और ये नदी मेरी चक्की को अपने पानी की शक्ति से चलाती है और मेरी चक्की दानो को पीस कर आटे में परिवर्तित कर देती है


मैं उन पिस्से हुए दानो को अपनी पत्नी और अपने बच्चों को खिलाता हूँ और आप भी वही पिसा हुआ अन्न खाते हैं."


राजा ने चक्की के मालिक को बीच में ही रोक दिया और कहा, "बस बस अब आगे मत कहो. अपने घर पर ही रहो और हमेशा खुश रहो.


परन्तु मैं तुमसे हमेशा ही ईर्ष्या करता रहूँगा. तुम्हारी ये धूल भरी टोपी मेरे इस हीरों जड़ित सोने के मुकुट से ज्यादा मूल्यवान है.


तुम्हारी चक्की तो बहुमूल्य है और वो चक्की तुमको इतना कुछ देती हैं जितना मुझे मेरा राज्य भी नहीं दे सकता है. अगर और लोग भी तुम्हारी तरह हो जाते तो ये दुनिया कितनी खूबसूरत हो जाती! अलविदा मेरे दोस्त!"


राजा वापिस चल दिया और वो अभी भी निराश और दुखी था. चक्की के मालिक ने फिर से अपना काम शुरू कर दिया और ख़ुशी ख़ुशी गीत गाने लगा.


मित्रों,


ये जरूरी नहीं के ख़ुशी के लिए धन दौलत, वैभव, नाम, और शक्ति ही जरूरी होते हैं. ख़ुशी तो मन से सम्बंधित होती है. बहुत छोटी छोटी चीजें भी हमको ख़ुशी दे सकती हैं.


दुर्भाग्यवश अधिकतर लोग अपने अंदर और अपने आस पास की ख़ुशी को देख नहीं पाते. मित्रों, अपनी ख़ुशी अपने आस पास ही खोजिये और सबको खुश रखिये.


विजेता विलियम के बेटे Vijeta William Ke Betey


इंग्लैंड के राजा विलियम को 'विलियम द कनक्वेरोर' या 'विजेता विलियम' के नाम से भी जाना जाता है. राजा विलियम के तीन बेटे थे.


एक दिन राजा विलियम कुछ सोच कर बहुत ही उदास हो गए. उनके दरबार के बुद्धिजीविओं ने उनसे उनकी उदासी का कारण पूछा.


राजा विलियम ने कहा, "मैं सोच रहा था के मेरी मृत्यु के बाद मेरे बेटे क्या करेंगे? अगर वो बुद्धिमान और शक्तिशाली नहीं होंगे तो मेरे साम्राज्य को कायम नहीं रख सकेंगे. मैंने ये साम्राज्य बहुत बहादुरी और परिश्रम से उनके लिए जीत कर तैयार किया है.


मुझे समझ नहीं आ रहा है के तीनो बेटों में से किस बेटे को मेरी मृत्यु के बाद इंग्लैंड का राजा बनना चाहिए."


बुद्धिजीवियों में से एक ने कहा, "महाराज, हमको ये मालूम करना होगा के आपके बेटों को सबसे अच्छा क्या लगता है. तभी हम ये निष्कर्ष निकाल सकेंगे के कौन सा बेटा राजा बनने के योग्य होगा. हमको तीनो से अलग अलग कुछ प्रश्न पूछने होंगे."


राजा विलियम ने कहा, "ठीक है आप सभी बुद्धिजीवी हैं आप लोग उनको अपने पास बुला कर उनसे प्रश्न कीजिये."


बुद्धिजीविओं ने कुछ समय आपस में परामर्श किया और फिर एक एक राजकुमार को अपने सामने बुलवाने का निर्णय लिया. उन्होंने वो प्रश्न भी तैयार कर लिए जो वो राजकुमारों को पूछने वाले थे.



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