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Excerpt for कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 15) by , available in its entirety at Smashwords

कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 15)

राजा शर्मा

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कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 15)

राजा शर्मा

Copyright@2018 राजा शर्मा Raja Sharma

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कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 15)

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दो शब्द

बेटा, तुम कुछ छोड़े जा रहे हो Beta, Tum Kuch Chode Ja Rahey Ho

काला या सफ़ेद Kaala Ya Safed

देवत्व का उपहार Devatva Ka Uphaar

तीन 'मैं' Teen 'Main'

माँ के हाथ Maan Ke Hath

मुसीबत में Museebat Mein

फिएरेलो लागार्डिया Fiorello LaGuardia

जानवर भी नहीं भूलते Jaanvar Bhi Nahi Bhooltey

कायरता एक आदत है Kaayarta Ek Aadat Hai

सांता क्लॉज़ नहीं होता Santa Claus Nahi Hota

माँ हमेशा रहती है Maan Hamesha Rehti Hai

कुत्ते सब जानते हैं Kutte Sab Jaantey Hain

अच्छाइयां लौट कर आती हैं Achhaiyan Lout Kar Aati Hain

सपनो का पीछा कीजिये (सत्य कथा) Sapno Ka Peecha Keejiye

ताँबे का सिक्का Tambey Ka Sikka

बिना कारण कुछ नहीं होता Bina Kaaran Kuch Nahi Hota

अरबपति संगीतकार जोशुआ बेल Joshua Bell

मेरे साथ घूमने चलोगे Mere Sath Ghoomney Chalogey

सिर्फ समय समझता है Sirf Samay Samajhta Hai

अंतिम होना भी लाभकारी है Antim Hona Bhi Labhkari Hai

चतुराई ज़रूरी है Chaturai Zaroori Hai

सुनिए! रुकिए! उत्तर दीजिये! Suniye! Rukiye! Uttar Deejiye!

विशवास और आँखों देखा Vishwaas Aur Ankhon Dekha

कुरूपता और प्रेम Kuroopta Aur Prem

अंदर के भेड़िये Andar Ke Bhediye



दो शब्द


विश्व के प्रत्येक समाज में एक पीढ़ी द्वारा नयी पीढ़ी को कथाएं कहानियां सुनाने की प्रथा कई युगों से चलती चली आ रही है. प्रारंभिक कथाएं बोलकर ही सुनायी जाती थी क्योंकि उस समय लिखाई छपाई का विकास नहीं हुआ था. जैसे जैसे समय बीतता गया और किताबें छपने लगी, बहुत सी पुरानी कथाओं ने नया जीवन प्राप्त किया.


इस पुस्तक में हम आपके लिए 25 प्रेरणा कथाएं लेकर आये हैं. यह इस श्रंखला की पंद्रहवीं पुस्तक है. हर कथा में एक ना एक सन्देश है और इन कथाओं में युवा पाठकों, विशेषकर बच्चों, के दिमाग में सुन्दर विचार स्थापित करने की क्षमता है. ये पुस्तक आपको निराश नहीं करेगी क्योंकि ये कहानियां दुनिया के विभिन्न देशों और समाजों से ली गयी हैं.


कहानियां बहुत ही सरल भाषा में प्रस्तुत की गयी हैं. आप अपने बच्चों को ऐसी कहानियां पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करके उनपर बहुत उपकार करेंगे. आइये मिलकर कथाओं की इस परम्परा को आगे बढ़ाएं.


बहुत धन्यवाद


राजा शर्मा


बेटा, तुम कुछ छोड़े जा रहे हो Beta, Tum Kuch Chode Ja Rahey Ho


एक शाम एक बेटा अपने बूढ़े पिताजी को खाना खिलाने के लिए एक प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट में ले गया. उस नौजवान के पिताजी बहुत कमजोर थे. बेटे ने पिताजी को अपने सामने टेबल के दूसरी तरफ बिठा दिया. वेटर ने दोनों के लिए खाना परोस दिया.


खाना खाते समय पिताजी के हाथ कांप रहे थे और उनका खाना उनके कपड़ों पर और टेबल पर इधर उधर गिर रहा था.


उनके कपडे खराब हो गए थे. उस रेस्टोरेंट में बैठे हुए सभी लोग उस बूढ़े पिता को घृणा की दृष्टि से देख रहे थे. बेचारा बेटा बिलकुल शांत बैठा अपने पिता को खाते हुए देखता रहा.


जब पिता ने खाना खा लिया, बेटे ने बहुत ही शांतिपूर्वक उनको सहारा देकर उठाया और उनको वाशरूम में ले गया.


उसने उनके हाथ मुंह धुलवाए और एक गीले कपडे से उनके कपड़ों पर पड़े हुए खाने के दाग भी पोंछ दिए. उसने पिताजी के बाल भी कंघी किये और उनका चश्मा उनकी आँखों पर लगा दिया.


बाप बेटा धीरे धीरे वाशरूम से बाहर निकले. बिल देने के बाद बेटे ने देखा के रेस्टोरेंट में बैठे हुए सभी लोग उन दोनों को ही देख रहे थे. वो सब सोच रहे थे के उस बेटे ने इतने बूढ़े बाप को रेस्टोरेंट में लाकर क्यों अपने आप को दुविधा में डाला था.


जब बाप बेटा रेस्टोरेंट से बाहर जाने लगे, बाप ने बेटे से कहा, "बेटा तुमको ऐसा नहीं लगता के तुम यहां कुछ छोड़े जा रहे हो?"


बेटे ने शांति पूर्वक कहा, "नहीं पिताजी, कुछ भी नहीं छूटा है."


बूढ़े बाप ने गुस्से से कहा, "नहीं तुम कुछ छोड़े जा रहे हो! तुम इस रेस्टोरेंट में हर बेटे के लिए एक पाठ और हर बाप के लिए आशा छोड़े जा रहे हो."


रेस्टोरेंट में बैठे सभी लोगों के चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगी. उनके सर शर्मिंदगी से नीचे झुक गए. उन्होंने समझ लिया था के वो समय उनके जीवन में आना भी निश्चित ही था.


मित्रों,


जिन लोगों ने कभी हमारी देखभाल की थी उन लोगों की देखभाल करना सबसे बड़ा सम्मान होता है.


हम सब जानते हैं के कैसे हमारे बचपन में हमारे माता पिता हमारा ध्यान रखते हैं और हमारी प्रत्येक मांग पूरी करते हैं और हमारे द्वारा फैलाई गयी गन्दगी साफ़ करते हैं.


अपने बूढ़े माता पिता और अन्य बूढ़े लोगों का पूरा सम्मान कीजिये और उनका अच्छे से ख़याल रखिये. आप कभी भी उस समय को मत भूलियेगा जब वो आपकी देखभाल करते थे.


काला या सफ़ेद Kaala Ya Safed


जूली जब स्कूल में पढ़ती थी वो बहुत ही जिद्दी और घमंडी थी. उसकी कक्षा में जिम नाम का एक प्रतिभाशाली लड़का भी पढता था.


एक दिन जूली और जिम में किसी बात को लेकर बहुत गरमा गरम वाद विवाद हो गया. वो दोनों बहुत देर तक अपने अपने तर्क देते रहे पर कोई भी हार मानने को तैयार नहीं था. जूली मानती थी को वो ठीक थी और जिम मानता था के वो ठीक था.


उनके शिक्षक ने उन दोनों के वाद विवाद को बहुत ध्यान से सुना और फिर आगे आकर उन दोनों को शांत करवा दिया.


शिक्षक ने जूली और जिम को अपने पास बुलाया और जिम को अपने डेस्क के एक तरफ और जूली को एक तरफ खड़ा कर दिया. शिक्षक के डेस्क पर एक गोल वस्तु रखी हुई थी. जूली डेस्क के बायीं तरफ खड़ी थी और जिम डेस्क के दायीं तरफ खड़ा था.


जूली ने देखा के वो गोल वस्तु काली थी. शिक्षक ने जिम से कहा, "ये मेरे टेबल पर रखी हुई गोल वस्तु कौन से रंग की है?"


जिम ने तुरंत जवाब दिया, "जी सफ़ेद रंग की."


जूली हैरान हो गयी क्योंकि वो स्पष्ट देख रही थी के वो वस्तु काले रंग की थी. दोनों के बीच फिर से वाद विवाद शुरू हो गया. जूली कह रही थी के वो गोल वस्तु काली थी और जिम जिद्द करने लगा के वो वस्तु सफ़ेद थी.


शिक्षक ने जूली को कहा, "तुम बताओ जूली, ये वस्तु कौन से रंग की है."


जूली ने तुरंत उत्तर दिया, "जी, ये गोल वस्तु काले रंग की है."


शिक्षक ने कहा, "अब तुम दोनों अपने अपने स्थान बदल लो. जिम तुम जूली की जगह आ जाओ और जूली तुम जिम के स्थान पर चली जाओ."


जूली और जिम ने अपने अपने स्थान बदल लिए. शिक्षक ने जूली से कहा, "ये गोल वस्तु कौन से रंग की है?"


जूली ने देखा के उस तरफ से वो वस्तु सफ़ेद थी. उसको उत्तर देना ही पड़ा, "जी ये सफ़ेद रंग की है."


वास्तव में वो गोल वस्तु आधी सफ़ेद और आधी काली थी. इधर खड़े होकर जब जूली ने देखा था वो काली दिखी पर जिम के स्थान पर जाकर जब उसने देखा तो वो वस्तु सफ़ेद दिखी.


जूली को एक बहुत बड़ा पाठ सीखने को मिल गया था. वो समझ गयी थी के हर बात में उसकी जिद्द ठीक नहीं थी.


मित्रों,


एक ही वस्तु को बहुत से लोग देख तो सकते हैं पर ये जरूरी नहीं के सभी को वो वस्तु एक सी ही दिख रही हो. हमको हरेक समस्या को दूसरों के दृष्टिकोण से भी देखना चाहिए. अपने दृष्टिकोण को सही मानना और जिद्द करना ठीक नहीं होता है.


किसी भी चीज़ की सत्यता तक पहुँचने के लिए उसके विभिन्न पक्षों का निरीक्षण करना जरूरी होता है.


देवत्व का उपहार Devatva Ka Uphaar


करोड़ों वर्ष पहले, दुनिया की रचना पूरी करने के बाद भगवान् अपने देवत्व के अंश, अपना तत्व, अपना सार, और ये वादा के मनुष्य अपने प्रयासों से जो चाहे बन सकता था, मनुष्य के लिए कहीं छोड़ना चाहते थे.


भगवान् उस उपहार को किसी ऐसे स्थान पर रखना चाहते थे जहाँ से वो मनुष्य को आसानी से प्राप्त ना हो सके.


भगवान् के देवताओं में से एक ने कहा, "प्रभु, अपने इस देवत्व के अंश को आप सबसे ऊँचे पर्वत की चोटी पर रख दीजिये."


भगवान् ने कहा, "नहीं, मनुष्य कुछ ही समय में रोमांचकारी काम शुरू कर देगा और नए नए स्थानों पर पहुँचने का प्रयास करेगा. वो पहाड़ चढ़ना सीख लेगा और देवत्व को प्राप्त कर लेगा."


एक और देवता ने कहा, "तब तो प्रभु, देवत्व को पृथ्वी की गहराई में छुपा दीजिये."


प्रभु ने कहा, "नहीं, मनुष्य जल्दी ही लोभी हो जाएगा और पृथ्वी में गहरे तक खोदना शुरू कर देगा और बहुमूल्य तत्वों को निकालने लगेगा."


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