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Excerpt for कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 11) by , available in its entirety at Smashwords

कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 11)

राजा शर्मा

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कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 11)

राजा शर्मा

Copyright@2018 राजा शर्मा Raja Sharma

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कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 11)

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दो शब्द

एक पहेली EK Paheli

दिल बड़ा कीजिये Dil Bada Keejiye

इतनी उदारता Itni Udaarta

सुन्दर प्रतिक्रिया Sundar Pratikriya

क्या आप भगवान् हैं Kya Aap Bhagwaan Hain

ईराक जाने वाले Iraq Jaaney Wale

ऐसे भी लोग हैं Aise Bhi Log Hain

दो शिक्षक Do Shikshak

अपने ड्राइवर के लिए Apne Driver Ke Liye

सोना या चांदी Sona Ya Chandi

बांसुरी चोर Bansuri Chor

वास्तविक डर Vastavik Dar

सोच का प्रभाव Soch Ka Prabhaav

उसके पिता के लिए Uskey Pita Ke Liye

ख़ुशी और भाग्य Khushi Aur Bhagya

कितना आनंद होता Kitna Anand Hota

ऐसा है जीवन Aisa Hai Jeevan

वो कैसे खुश हैं Wo Kaise Khush Hain

इतना लोभ ठीक नहीं Itna Lobh Theek Nahi

शिक्षा या बुद्धि Shiksha Ya Buddhi

आकाश देखते हैं Akash Dekhte Hain

बेटे को उपहार Betey Ko Uphaar

राजा और महात्मा Raja Aur Mahaatma

जेंकाई की सुरंग Zenkai Ki Surang

चेरी का पेड़ Cherry Ka Ped



दो शब्द


विश्व के प्रत्येक समाज में एक पीढ़ी द्वारा नयी पीढ़ी को कथाएं कहानियां सुनाने की प्रथा कई युगों से चलती चली आ रही है. प्रारंभिक कथाएं बोलकर ही सुनायी जाती थी क्योंकि उस समय लिखाई छपाई का विकास नहीं हुआ था. जैसे जैसे समय बीतता गया और किताबें छपने लगी, बहुत सी पुरानी कथाओं ने नया जीवन प्राप्त किया.


इस पुस्तक में हम आपके लिए 25 प्रेरणा कथाएं लेकर आये हैं. यह इस श्रंखला की ग्यारवीं पुस्तक है. हर कथा में एक ना एक सन्देश है और इन कथाओं में युवा पाठकों, विशेषकर बच्चों, के दिमाग में सुन्दर विचार स्थापित करने की क्षमता है. ये पुस्तक आपको निराश नहीं करेगी क्योंकि ये कहानियां दुनिया के विभिन्न देशों और समाजों से ली गयी हैं.


कहानियां बहुत ही सरल भाषा में प्रस्तुत की गयी हैं. आप अपने बच्चों को ऐसी कहानियां पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करके उनपर बहुत उपकार करेंगे. आइये मिलकर कथाओं की इस परम्परा को आगे बढ़ाएं.


बहुत धन्यवाद


राजा शर्मा


एक पहेली EK Paheli


एक दिन मेरी माँ ने मुझसे कहा, "हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग कौन सा होता है?" मैं काफी देर तक सोचता रहा.


आने वाले कई वर्षों के दौरान मेरी माँ कई बार यही प्रश्न पूछती थी और मैं अलग अलग उत्तर देता रहता था.


मैं जब करीब सात साल का था तो उन्होंने यही सवाल फिर से पुछा. मैंने कहा, "माँ, मेरे कान ही मेरे सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं."


माँ ने मुस्कुरा कर कहा, "नहीं, दुनिया में लाखों लोग बहरे हैं. परन्तु तुम सोचते रहो, मैं किसी दिन फिर पूछूँगी."


जब मैं लगभग ११ वर्ष का था तो माँ ने एक दिन फिर से वही प्रश्न पूछा. मैंने कहा, "माँ, हमारी आंखें ही सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं."


माँ ने फिर कहा, "नहीं, ये गलत उत्तर है, परन्तु तुम जल्दी सीख रहे हो. दुनिया में लाखों लोग अंधे हैं और उन्होंने प्रकाश कभी देखा ही नहीं."


आने वाले कई वर्षों तक मैं पढता रहा और ज्ञान प्राप्त करता रहा. माँ ने दो तीन बार फिर से वही प्रश्न पूछा पर मेरे उत्तर गलत थे.


एक दिन मेरे दादाजी की मृत्यु हो गयी. घर में सभी लोग उनकी मृत्यु से शोक में डूबे हुए थे. मेरी माँ और पिताजी रो रहे थे. और भी सभी रिश्तेदार हमारे शोक में शामिल थे.


मैंने उस दिन से पहले कभी भी अपने पिताजी को रोते हुए नहीं देखा था. दादाजी को जब विदाई देने का समय आया, मेरी माँ ने मुझसे कहा, "क्या तुम्हें मालूम हुआ के हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग कौन सा है?"


दादाजी की अंत्येष्टि के समय पर ऐसा प्रश्न पूछना मुझे थोड़ा अजीब सा लगा. मैं तो सोचता था के ये मेरे और मेरी माँ के बीच एक पहेली थी जो बहुत वर्षों से चल रही थी.


मेरी माँ ने जब मेरे चेहरे पर असमंजस के भाव देखे तो उन्होंने कहा, "ये प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है. इससे ये मालुम हो जायेगा के तुमने वास्तव में अपना जीवन जिया है.


पिछले कई वर्षों में तुमने मुझे भिन्न भिन्न अंगों के नाम दिए पर मैंने तर्क के साथ उनको गलत प्रमाणित किया. परन्तु आज मुझे तुमको बताना ही होगा..."


मेरी माँ ने मुझे बहुत ही प्यार से देखा. उनकी आँखों से आंसू गिर रहे थे. उन्होंने रोते रोते कहा, "मेरे बेटे, हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग कन्धा होता है."


मैंने कहा, "कन्धा महत्वपूर्ण है क्योंकि उसपर हमारा सर टिका होता है?"


माँ ने गंभीरता से कहा, "नहीं मेरे बेटे, कन्धा इसलिए महत्वपूर्ण नहीं होता के इसपर तुम्हारा सर टिका होता है, बल्कि ये इसलिए महत्वपूर्ण होता है क्योंकि तुम किसी अपने के सर को अपने कंधे का सहारा दे सको और उसके दुःख में उसको राहत पहुंचा सको.


हर व्यक्ति को जीवन में कभी ना कभी रोने के लिए किसी के कंधे जी जरूरत होती है."


माँ ने अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया और मेरे दादाजी को याद करते हुए जार जार रोने लगी.


मैं समझ गया के हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग, कन्धा, बिलकुल भी स्वार्थी नहीं होता है. ये कन्धा औरों को सहारा देता है और उनके दुःख में उनको राहत देता है.


मित्रों,


किसी के दुःख में उसका साथ देना ही सबसे बड़ी बात है. आप जो करते हैं वो तो शायद लोग भूल जाएंगे, परन्तु वो ये कभी नहीं भूलेंगे के दुःख के समय में आपने उनको कैसे सहारा दिया था.


दिल बड़ा कीजिये Dil Bada Keejiye


एक माँ की १२ साल की एक बेटी थी जो सातवीं कक्षा में पढ़ती थी. छुट्टियों के बाद जब उसकी बेटी एमा वापिस स्कूल गयी, उसको कई नए अनुभव प्राप्त हुए. वो स्कूल की सब बातें घर वापिस आने के बाद अपनी माँ को बताती थी.


एक दिन उसने अपनी माँ से कहा,"माँ, हमारी कक्षा में एक नया लड़का आया है. उसका नाम जैक है. वो बहुत ही मोटा है.


सब लोग उसको दिन भर छेड़ते रहते हैं और उसका मज़ाक उड़ाते हैं. यहाँ तक के हमारे टीचर भी उसका मजाक उड़ाते हैं और मोटापे के चुटकुले सुनाते हैं. बेचारा जैक कुछ भी नहीं कर सकता."


माँ ने एमा से कहा, "अभी वो लड़का नया नया है, कुछ दिन बाद सब ठीक हो जाएगा और लोग उसका मज़ाक उड़ाना बंद कर देंगे."


कई हफ्ते बीत गए पर ऐसा नहीं हुआ. एमा घर आने के बाद हमेशा चिंता व्यक्त करती थी के कैसे कक्षा के अन्य छात्र जैक को तंग करते रहते हैं.


एक दिन उसने कहा, "माँ, उसके मम्मी पापा गरीब हैं और वो उसके लिए कॉपी किताबें और अन्य चीज़ें नहीं खरीद सकते. वो बेचारा कभी पेंसिल, कभी इरेज़र, तो कभी पेपर इत्यादि माँगता रहता है."


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