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बच्चों की दुनिया: ज्ञानवर्धक कहानियां (2)

Raja Sharma

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बच्चों की दुनिया: ज्ञानवर्धक कहानियां (2)

Raja Sharma

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बच्चों की दुनिया: ज्ञानवर्धक कहानियां (2)

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दो शब्द

बिना हाथों वाली शेफ (सत्य कथा)

सही कीमत

प्रेमभाव

सही गलत दिशा

अहंकार झुकता है

प्रतिष्ठा का सौदा

क्यों माँगूँ भीख

जो मांगोगे वही मिलेगा

अपशब्द

तीन याद रखने योग्य बातें

साफ़ नियत

ख़ुशी का राज़

जो बीत गया सो बीत गया

जिस तन लागे सो ही जाने

बहुत सरल समाधान

सपनो का पीछा

मेहनत का फल खाता हूँ

दोस्त की परीक्षा

सवा सेर गेहूँ

सुकरात का विवेक



दो शब्द



अगर आप एक विचारशील अभिभावक हैं तो आप अपने बच्चों को अवश्य ही सुन्दर सुन्दर ज्ञानवर्धक कहानियां सुनाना चाहेंगे. इस पुस्तक में प्रस्तुत की गयी कहानियां बच्चों के ज्ञान में वृद्धि करने के साथ साथ उनका बहुत मनोरंजन भी करेंगी.



इस श्रंखला की ये दूसरी पुस्तक है. कुछ समय के बाद इस श्रंखला का तीसरा भाग भी प्रकाशित होने वाला है. आप देश विदेश जहां भी हों अपनी भाषा से जुड़े रहने का ये एक सुन्दर साधन है. आप इस पुस्तक को अपने कम्प्यूटर, आईपैड, टैबलेट, या मोबाईल पर डाउनलोड करके आसानी से पढ़ सकते हैं.



शुबकामनाएं



राजा शर्मा



बिना हाथों वाली शेफ (सत्य कथा)



मरिकेल ऐप्टैन दुनिया की अकेली ऐसी शेफ हैं जिनके दोनों हाथ नहीं हैं. एक वीभत्स घटना में अपने दोनों हाथ गवां देने वाली इस बहादुर लड़की ने जीवन में वो सब कुछ पा लिया है जो एक दोनों हाथों वाला व्यक्ति भी मुश्किल से ही पाता है.



वो जब सिर्फ ११ बरस की थी २५ सितम्बर २००० के दिन वो और उसके अंकल पानी लाने घर से दूर गए हुए थे. अचानक कुछ लोगों ने उनको घेर लिया. उनके हाथों में धारदार हथियार थे. उन्होंने मरिकेल और उसके अंकल को नीचे झुक जाने का आदेश दिया.



वो आक्रमणकारी दोनों को बहुत बुरी तरह से पीटने लगे. वो उन आक्रमणकारियों को जानती थी क्योंकि वो उनके पडोसी ही थे. जब उसने देखा के वो लोग उसको मार ही डालेंगे, वो उठकर भागने लगी. एक आक्रमणकारी ने उसको पकड़ ही लिया.



वो हाथ जोड़कर रोने और गिड़गिड़ाने लगी, 'मुझे मत मारो, मैंने आपका क्या बिगाड़ा है? कृपया मुझे छोड़ दीजिये."



उन आक्रमणकारियों को बिलकुल दया नहीं आयी. एक ने उसके गले पर चाक़ू से प्रहार किया. वो नीचे गिर गयी और बेहोश हो गयी. लगभग आधे घंटे के बाद जब उसकी आँख खुली तो उसने देखा के वो लोग कुछ ही दूरी पर खड़े थे.



उसने आँखें बंद कर ली और मृत होने का नाटक किया. जब वो लोग चले गए तो उसके होश उड़ गए. उसके दोनों हाथ काट दिए गए थे और वो उसकी हथेलियां नीचे लटक रही थी. वो चिल्लाने लगी और अचानक दर्द से कराहने लगी.



उसकी मां उसकी आवाज सुनकर आ गयी और तुरंत ही उसको हस्पताल लेजाया गया. दुर्भाग्यवश उसके हाथ काट दिए गए. उस छोटी लड़की की तो जैसे दुनिया ही समाप्त हो गयी थी.



जब मां और बेटी घर वापिस आये तो उन्होंने पाया के उनके घर को लूट लिया गया था और कुछ भी नहीं बचा था. उनके एक रिश्तेदार ने हस्पताल के पैसे भी दे दिए और उसके सहयोग से अपराधियों को भी पकड़ लिया गया.



मरिकेल एक बहादुर लड़की थी इसीलिए उसने कभी भी किसी को कुछ नहीं कहा. उसने फिर से एक साधारण जीवन जीने का निश्चय कर लिया.



उसको इश्वर पर बहुत विशवास था. वो सोचने लगी के उसको शायद भगवान् ने किसी विशेष कार्य के लिए ही भेजा था.



उसने खूब मेहनत से स्कूल की पढाई पूरी की और २००८ में होटल मैनेजमेंट का कोर्स भी पूरा कर लिया. उसको बचपन से ही मां को खाना बनाते हुए देखना अच्छा लगता था. उसने शेफ बनने का निर्णय लिया और शेफ की शिक्षा भी पूरी कर ली.



बिना हाथों वाली वो लड़की धीरे धीरे खाना बनाने की कला में पारंगत हो गयी. उसके बारे में लिखा और दिखाया जाने लगा. मनीला के होटल शंगरीला ने उसको अपने एक प्रोजेक्ट पर काम करने का मौका भी दे दिया.



आज वो एक सफल शेफ के रूप में काम कर रही है और बिना हाथों से ही कितने ही लोगों को स्वादिष्ट व्यंजन पका पका कर खिलाती है.



वो सिर्फ किसी गरम बर्तन उठाने या किसी शीशी या डब्बे का ढक्कन खोलने के लिए ही किसी का सहयोग लेती है वरना सब कुछ खुद ही करती है.



उसको होटल शंगरीला, मनीला, में काम करते हुए देख के लाखों लोग उससे प्रेरित होते हैं. आज उसके पास जीवन की सभी सुख सुविधाएं हैं और वो सफलता की सीढ़ियां चढ़ रही है.



मित्रों,



अक्सर हम अपने जीवन में आने वाली छोटी -मोटी परेशानियों से घबरा जाते हैं और अपना विश्वास कमजोर होने देते हैं, पर जीवन में हर व्यक्ति के लिए कुछ न कुछ तो होता ही है.



यदि भगवान् ना करे आपके साथ या आपके किसी प्रिय के साथ ऐसे हो जाए तो हताश ना होकर जीवन में अपना स्थान बनाने की कोशिश तो आप कर ही सकते हैं.



हमें शारीरिक रूप से अपांग व्यक्तियों को दया दिखने की जरूरत नहीं है क्योंकि ऐसा करने से वो खुद को कमजोर और असमर्थ मानते हैं. हमें उनको कोई ना कोई काम करने के लिए प्रेरित करना चाहिए और उनके साथ साधारण लोगों की तरह ही व्यव्हार करना चाहिए.



सही कीमत



एक बालक अपने पिता के साथ अपने पिता की लोहे के सामान की दुकान पर बैठा था. वो इधर उधर पड़े हुए सामान को देख रहा था. उसके पिता लोगों को सामान बेच रहे थे.


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